नर्मदा जयंती क्यों मनाई जाती है (Narmada Jayanti) इसके पीछे एक सूक्ष्म प्रसंग है चलिए आपको इससे अवगत करते है एक बार जब पृथ्वी पर अकाल पड़ा और सभी देवता और मनुष्य पीड़ित हुए। सभी ने भगवान से इस अकाल से बचाने की प्रार्थना की। चूंकि ब्रह्मा और विष्णु ऐसा करने में असमर्थ थे, तब सभी ने भगवान शंकर की पूजा और आराधना और मंत्रोचारण किया। तभी शंकर के शरीर से स्वेदजल की बूंद जमीन पर गिरी और उससे एक नदी बन गई। जैसे ही वह एक सुंदर कन्या के रूप में प्रकट हुई तब शंकर जी ने उसका नाम ‘नर्मदा’ रखा। भारतीय संस्कृति और धर्म में नर्मदा नदी का विशेष महत्व है।
नर्मदा जयंती के तथ्य – Narmada Jayanti
- नर्मदा परिक्रमा- नर्मदा परिक्रमा की अवधारणा का भारतीय धर्म और संस्कृति में आध्यात्मिक महत्व है। नर्मदा जी को दाहिने हाथ पर रखकर परिक्रमा की जाती है। यह यात्रा ओंकारेश्वर से शुरू होती है। इसके लिए संकल्प लिया जाता है और यात्रा शुरू होती है। यात्रा के समापन पर, कुमारी पूजा की जाती है, क्योंकि नर्मदा को कुंवारी माना जाता है।
- नर्मदा नदी भगवान शंकर के पसीने से उत्पन्न होती है और पौराणिक साहित्य में देवताओं द्वारा किए गए पापों को धोने के लिए इस नदी के महत्व का वर्णन किया गया है।
- नर्मदा नदी के दर्शन मात्र से हमारे द्वारा किए गए सभी पाप धुल जाते हैं। इसी मान्यता के चलते कई श्रद्धालु नर्मदा नदी में स्नान करते हैं।
- पुराणों के अनुसार नर्मदा नदी पहुत ही पवित्र मानी जाती है।
- मार्कंडेय ऋषि, अगस्त्य ऋषि जैसे तपस्वियों ने नर्मदा के तट पर साधना और तपस्या की थी।
- पाप नाशिनी जल है नर्मदा नदी के जल से मनुष्य तो क्या देवता भी पवित्र होते है।
- 12 ज्योतिर्लिंग में एक ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के तट पर स्थित है उजैन नगर मध्य प्रदेश में।
- नर्मदा नदी भगवान शिव के द्वारा प्रकट हुई थी।
- नर्मदा जी के प्रकट होने का स्थान अमरकंटक है वही से नर्मदा जी जल के रूप में प्रकट हुई थी।
- नर्मदा महोत्सव मध्यप्रदेश के कुछ स्थान जैसे अमरकंटक, जबलपुर , ओम्कारेश्वर में बहुत भव्य रूप में पूजा और अर्चना का आयोजन किया जाता है।
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