होली दहन में करें यह विशेष उपाय जानिए किस राशी पर क्या है शुभ | Happy Holi 2026

होली दहन में करें यह विशेष उपाय जानिए किस राशी पर क्या है शुभ | Happy Holi 2026

हमारे सभी पाठकों को होलिका दहन और धुरेड़ी की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं, इस होली से महौल में हम आपके लिए लाये है कुछ जानकारियाँ जिसमे हम आपको बतायेंगे होली कब है, क्या है होलिका गहन का मुहूर्त, कैसे होली पर्व का करें सदुपयोग, गौकाष्ठ से होली निर्माण और होली में किस राशी में कौन से उपाय करना रहेगा शुभ तो आइये आपको इस पोस्ट में हम विष्टार से बताते है :- साथ ही हम आपके लिए लाये है बृज की होली का इतिहास क्यूंकि होली का अध्यात्मिक रहस्य है।

होलिका दहन तिथि और मुहूर्त (3 मार्च 2026, मंगलवार)

दिनांक 24 मार्च रविवार को सायंकाल में फाल्गुन शुक्ल पक्ष की प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा होने से होली पर्व इसी दिन मनाया जाएगा। होलिका दहन में भद्रा वर्जित मानी गयी है। इस वर्ष 3 मार्च को भद्रा दिन में सुबह 9:55 से शुरू होकर रात 11:15 तक रहेगी। शास्त्र अनुसार होलिका दहन में यदि ‘भद्रा’ निशीथ (अर्धरात्रि) से पहले समाप्त हो जाती है तो भद्रा समाप्ति पर ही होलिका दहन करना चाहिए।

इस वर्ष भद्रा निशिथ समय मध्य रात्रि से पूर्व ही समाप्त हो रही है अतः दिनांक 24 मार्च को भद्राकाल के पश्चात रात्रि 11:15 से रात्रि 12:33 तक होलिका दहन करना शास्त्रोक्त है।

होलिका दहन मुहूर्त-: 03 मार्च 2026, रविवार रात्रि 11:15 से रात्रि 12:33 तक।

होली पर करें विशेष उपाय | होलिका दहन तिथि और मुहूर्त | Happy Holi 2024

होली पर्व का करें सदुपयोग | Happy Holi 2026

पर्व काल के दिन का अपना एक विशेष महत्व होता है। इस समय ग्रह- नक्षत्र- निहारिका प्रकृति में एक विशेष आभामंडल का निर्माण करतें हैं। और यह समय परम सत्ता व श्रेष्ठ ऊर्जाओं से जुड़ने का विशेष समय होता है।

लेकिन इन सभी बातों से सामान्य लोग अनभिज्ञ रहते हैं और वे इस श्रेष्ठ समय में केवल मात्र खेलकूद, खान-पान, मनोरंजन तक सीमित रह जाते हैं। वहीं ‘साधक’ लोग पर्व काल के समय को साधना- उपासना जैसे श्रेष्ठ क्रियाकलापों में व्यतीत करते हैं।

सही मायने में पर्वकाल का समय व्यक्ति के विचारों के आरोहण का समय होता है। इस समय जितने भी श्रेष्ठ से श्रेष्ठ विचार व कार्य संपन्न किए जाएं, उतना ही व्यक्ति आत्मोन्नति को प्राप्त हो सकता है।

कुछ पर्व ऐसे होते हैं जिनकी रात्रियों का विशेष महत्व होता जैसे- होली दीपावली नवरात्रि शिवरात्रि। होली पर्व को दीपावली, नवरात्र, शिवरात्रि के समान महारात्रियों में से एक माना गया है। इस रात में साधना करने से अन्य दिनों की अपेक्षा शीघ्रता से साधना- उपासना सिद्ध होती है, अतः इन पवित्र रात्रियों का हमें पूरे विवेक के साथ सदुपयोग करना चाहिए।।

होली पर करें विशेष उपाय – Holi 2026

होली पर्व के दौरान होलिका दहन के अवसर पर आप अपनी राशि के अनुसार निम्न वस्तुओं की आहुतियां देकर सुख, शांति, समृद्धि व स्वास्थ्य में लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

मेष राशि -:

उपाय-: होलिका दहन में जौ, गुड़ व लाल चंदन की लकड़ी की आहुति चढ़ाएं।

वृषभ राशि-:

उपाय-: होलिका दहन में मिश्री एवं नारियल गिट की आहुति चढ़ाएं।

मिथुन राशि -:

उपाय-: होलिका दहन में कपूर एवं इलायची की आहुति चढ़ाएं।

कर्क राशि-:

उपाय-: होलिका दहन में चावल या सफ़ेद तिल की आहुति चढ़ाएं।

सिंह राशि-:

उपाय-: होलिका दहन में जौ, गूगल एवं गुड की आहुति चढ़ाएं।

कन्या राशि-:

उपाय-: होलिका दहन में पान और हरी इलायची की आहुति चढ़ाएं।

तुला राशि-:

उपाय-: होलिका दहन में कपूर की आहुति चढ़ाएं।

वृश्चिक राशि-:

उपाय-: होलिका दहन में गुड़ व लाल चंदन की लकड़ी की आहुति चढ़ाएं।

धनु राशि-:

उपाय-: होलिका दहन में हल्दी की गांठ व नारियल गिट की आहुति चढ़ाएं।

मकर राशि-:

उपाय-: होलिका दहन में काले तिल व लौंग की आहुति चढ़ाएं।

कुंभ राशि-:

उपाय-: होलिका दहन में काली सरसों, लौंग व गूगल की आहुति चढ़ाएं।

मीन राशि-:

उपाय: होलिका दहन में पीली सरसों व गुड की आहुति चढ़ाएं।।

होलिका दहन के अवसर देसी गाय के गोबर से बने हुए कंडे (बिड़कले), कपूर, लौंग, गुड, गूगल आदि वस्तुओं की आहुतियां अवश्य देनी चाहिए, इससे वातावरण शुद्ध व पवित्र होता है।

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गौकाष्ठ से होलीका निर्माण

हर बार की भांति इस बार भी हमारे ग्रुपों से जुड़े हुए काफी महानुभाव ने होलिका दहन के लिए होली निर्माण में गोकाष्ठ का उपयोग करने का संकल्प लिया है जो काफी सराहनीय है।

सनातन संस्कृति में भारतीय गाय की प्रत्येक वस्तु काफी पवित्र मानी गई है, जब गौकाष्ठ से होलिका दहन किया जाएगा तो वातावरण भी पवित्र होगा और न जाने कितने ही वृक्ष कटने से बच जाएंगे और जिससे पशु- पक्षियों का आश्रय भी बचेगा। और सच मायने में उत्सव- त्यौहार उसी का नाम है जिसमें प्रकृति का प्रत्येक जीव उल्लासित- आह्लादित व आनंदित हो सके।

गौकाष्ठ के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण को तो बल मिलेगा ही, साथ ही साथ इस कार्य से जुड़े लोगों को आर्थिक लाभ भी होगा।

अतः आप भी अपने नगर, गांव, गली- मोहल्ले में गौकाष्ठ से होली बनाकर ही होलिका दहन करें।। धन्यवाद।।


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