Shri Shanidev Aarti –शनि देव भगवान सूर्य तथा माता छाया के पुत्र हैं। इन्हें क्रूर ग्रह का श्राप उनकी पत्नी से प्राप्त हुआ था। इनका वर्ण कृष्ण है और यह कौए की सवारी करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शनिदेव श्री कृष्ण के अनन्य भक्त थे और बाल्यावस्था में ही भगवान श्री कृष्ण की आराधना में लीन रहते थे। शनि देव को न्याय का देवता भी कहा जाता है और शनि देव की कृपा पात्र भक्तों के सारे कष्ट प्रभु हर लेते है तो आइये स्मरण करें “श्री शनि देव आरती जय जय शनि देव”
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शनि देव आरती लिरिक्स इन हिंदी | Shri Shanidev Aarti
ॐ जय शनिदेव हरे, प्रभु जय रविपुत्र हरे ।
आरती जो तेरी गावे, संकट से उबरे ।। ॐ जय….
सूर्य पुत्र बलधारी, यम के हैं भ्राता ।
छाया मातु भवानी, वाहन हैं भैंसा ।। ॐ जय….
तेरी क्रूर दृष्टि से, शिव ग्रासे घासा ।
दशरथ नन्दन भटके, वन-वन में प्यासा ।। ॐ जय….
गणिपति पे की दृष्टि, सिर विच्छेद किए ।
कुपित हुए रावण पे, लंका दहन किए।। ॐ जय….
पुत्र व नारी बिकाए, हरिश्चन्द्र राजा ।
नल को वन भटकाए, तूने महाराजा ।। ॐ जय….
होत प्रसन्न हैं जिनपे, बना देत राजा ।
दृष्टि टेढ़ी करते, मिटते महाराजा ।। ॐ जय….
देव-असुर व मानव, सब तुमसे डरते ।
कुपित होत ही सबके सुख-सम्पत्ति हरते ।। ॐ जय….
आरती जो तेरी गावे, विपदा कष्ट टरें ।
सुख सम्पत्त पावे, लक्ष्मी घर में बसे ।। ॐ जय….
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श्री शनि देव आरती लिरिक्स विडियो – Shri Shanidev Aarti Lyrics
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