शिव लिंगाष्टकम स्तोत्रम् एक दिव्य श्लोक है, जिसके पठन पाठन का महत्त्व शिव पंचाक्षर स्तोत्र की तुलना में उत्कृष्ट है, इसको भक्ति गीत के रूप में भी सुना और गया जाता है क्यूंकि लिंगाष्टकम में भगवान शिव के मूर्ति रूप की जगह उनके लिंग रूप का वर्णन किया जाता है यह स्तोत्र शिव लिंग पूजा को वर्णित करने के साथ शिव में ध्यान लगाने से प्राप्त होने वाले अद्भुद, अध्यात्मिक और सांसारिक लाभों के बारे में भी आपको अवगत करता है लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम् के लाभ आपको इसके उच्चारण से ही प्रमाणित होते है, एक नयी उर्जा का विस्तार और निरंतर पाठ से मानसिक भयमुक स्थिति का निर्माण प्रारंभ होता है (Shiva Lingashtakam Lyrics in Hindi)
“ब्रह्मा मुरारी सुरार्चिता लिंगम” एक प्रसिद्ध भक्ति स्तोत्र है जो भगवान शिव की स्तुति करता है और लिङ्गाष्टकं के माध्यम से उनकी महिमा को गाता है। यह भजन शिव लिंग पूजा के महत्व को स्तुति करता है, जिसमें भक्तों को उसकी दिव्यता का अनुभव होता है और उन्हें मिलने वाले लाभों का महत्व बताता है। जरुर स्मरण करें
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शिव जी के पवित्र स्तोत्र को पढने मात्र से एक अतुलनीय महिमा का अनुभव होता है क्यूंकि हमने भी इसका अनुभव किया है, पंडित श्री नन्द कुमार जी अनुसार यदि इसका नित्य पाठ एकांत और अध्यात्म के साथ प्रातः काल 3 या 5 बार किया जाये तो आपभी इसकी अद्भुद शक्ति का अनुभव कर सकते है
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लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम् (Shiva Lingashtakam Lyrics Sanskrit)

ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिंगं, निर्मलभासित शोभित लिंगम् |
जन्मज दुःख विनाशक लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 1 ‖
देवमुनि प्रवरार्चित लिंगं, कामदहन करुणाकर लिंगम् |
रावण दर्प विनाशन लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 2 ‖
सर्व सुगंध सुलेपित लिंगं, बुद्धि विवर्धन कारण लिंगम् |
सिद्ध सुरासुर वंदित लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 3 ‖
कनक महामणि भूषित लिंगं, फणिपति वेष्टित शोभित लिंगम् |
दक्षसुयज्ञ विनाशन लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 4 ‖
कुंकुम चंदन लेपित लिंगं, पंकज हार सुशोभित लिंगम् |
संचित पाप विनाशन लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 5 ‖
देवगणार्चित सेवित लिंगं, भावै-र्भक्तिभिरेव च लिंगम् |
दिनकर कोटि प्रभाकर लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 6 ‖
अष्टदळोपरिवेष्टित लिंगं, सर्वसमुद्भव कारण लिंगम् |
अष्टदरिद्र विनाशन लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 7 ‖
सुरगुरु सुरवर पूजित लिंगं, सुरवन पुष्प सदार्चित लिंगम् |
परमपदं परमात्मक लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 8 ‖
लिंगाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेश्शिव सन्निधौ |
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ‖
|| इति श्री लिंगाष्टकम् सम्पूर्णं ||
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लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम् in hindi (Shiva Lingashtakam Lyrics Meaning)

ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिंगं, निर्मलभासित शोभित लिंगम् |
जन्मज दुःख विनाशक लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 1 ‖
(“ब्रह्मा, मुरारी, सुरों द्वारा पूजित लिङ्ग, जो निर्मल आलोकित और शोभायमान है। जन्म और जन्म के दुःख को नष्ट करने वाला लिङ्ग, उस सदाशिव लिङ्ग को मैं प्रणाम करता हूँ।”)
देवमुनि प्रवरार्चित लिंगं, कामदहन करुणाकर लिंगम् |
रावण दर्प विनाशन लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 2 ‖
(“देवों और महर्षियों द्वारा पूजित लिङ्ग, कामदेव को नष्ट करने वाला और दयालु लिङ्ग । रावण के अहंकार का नाश करने वाला लिङ्ग, उस सदाशिव लिङ्ग को मैं प्रणाम करता हूँ।”)
सर्व सुगंध सुलेपित लिंगं, बुद्धि विवर्धन कारण लिंगम् |
सिद्ध सुरासुर वंदित लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 3 ‖
(“सभी सुगंधित और सुलेपित लिङ्ग, बुद्धि को विकसित करने वाला कारण लिङ्ग। सिद्ध, सुर, और असुरों द्वारा पूजित लिङ्ग, उस सदाशिव लिङ्ग को मैं प्रणाम करता हूँ।”)
कनक महामणि भूषित लिंगं, फणिपति वेष्टित शोभित लिंगम् |
दक्षसुयज्ञ विनाशन लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 4 ‖
(“सोने और महामणि से सजे हुए लिङ्ग, फणिपति के वेष में शोभित लिङ्गः । दक्ष यज्ञ के विनाशक लिङ्ग, उस सदाशिव लिङ्ग को मैं प्रणाम करता हूँ।”)
कुंकुम चंदन लेपित लिंगं, पंकज हार सुशोभित लिंगम् |
संचित पाप विनाशन लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 5 ‖
(“कुंकुम और चन्दन से लेपित लिङ्ग, पंकज की माला से सजीवित लिङ्ग। संचित पापों का नाश करने वाला लिङ्ग, उस सदाशिव लिङ्ग को मैं प्रणाम करता हूँ।”)
देवगणार्चित सेवित लिंगं, भावै-र्भक्तिभिरेव च लिंगम् |
दिनकर कोटि प्रभाकर लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 6 ‖
(“देवताओं द्वारा पूजित और सेवित लिङ्ग, भक्तों की भावनाओं से ही भरा हुआ लिङ्ग । सूर्य के करोड़ों प्रकाशमय लिङ्ग, उस सदाशिव लिङ्ग को मैं प्रणाम करता हूँ।”)
अष्टदळोपरिवेष्टित लिंगं, सर्वसमुद्भव कारण लिंगम् |
अष्टदरिद्र विनाशन लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 7 ‖
(“अष्टदलों से आवृत लिङ्ग, सभी समुद्रों के कारण लिङ्ग। अष्टदरिद्र का नाश करने वाला लिङ्ग, उस सदाशिव लिङ्ग को मैं प्रणाम करता हूँ।”)
सुरगुरु सुरवर पूजित लिंगं, सुरवन पुष्प सदार्चित लिंगम् |
परमपदं परमात्मक लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ‖ 8 ‖
(“देवता गुरुओं और सबसे श्रेष्ठ द्वारा पूजित लिङ्ग, सुरवन के पुष्पों से सदा आराधित लिङ्ग । सबसे ऊँचा और परम परमात्मा रूपी लिङ्ग, उस सदाशिव लिङ्ग को में प्रणाम करता हूँ।”)
लिंगाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेश्शिव सन्निधौ |
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ‖
(“जो भक्त शिव के समीप इस पुण्य लिंगाष्टक का पाठ करता है, वह शिवलोक को प्राप्त होता है और शिव के साथ आनंदित होता है।”)
|| इति श्री लिंगाष्टकम् सम्पूर्णं ||
Lingashtakam Lyrics in English (शिव लिंगाष्टकम स्तोत्रम्)

Brahma Muraari Sura Aarcita Linggam Nirmala Bhaasita Shobhita Linggam।
Janmaja Duhkha Vinaashaka Linggam Tat Prannamaami Sadaashiva Linggam॥1॥
Deva Muni Pravara Aarcita Linggam Kaama Dahan Karunnaa Kara Linggam।
Raavanna Darpa Vinaashana Linggam Tat Prannamaami Sadaashiva Linggam॥2॥
Sarva Sugandhi Sulepita Linggam Buddhi Vivardhana Kaaranna Linggam।
Siddha Sura Asura Vandita Linggam Tat Prannamaami Sadaashiva Linggam॥3॥
Kanaka Mahaamanni Bhuussita Linggam Phanni Pati Vessttita Shobhita Linggam।
Dakssa Su Yajnya Vinaashana Linggam Tat Prannamaami Sadaashiva Linggam॥4॥
Kungkuma Candana Lepita Linggam Pangkaja Haara Su Shobhita Linggam।
San.cita Paapa Vinaashana Linggam Tat Prannamaami Sadaashiva Linggam॥5॥
Deva Ganna Aarcita Sevita Linggam Bhaavair Bhaktibhir Eva Ca Linggam।
Dinakara Kotti Prabhaakara Linggam Tat Prannamaami Sadaashiva Linggam॥6॥
Asstta Dalo Parivessttita Linggam Sarva Samudbhava Kaaranna Linggam।
Asstta Daridra Vinaashita Linggam Tat Prannamaami Sadaashiva Linggam॥7॥
Suraguru Suravara Puujita Linggam Suravana Pusspa Sada Aarcita Linggam।
Paraatparam Paramaatmaka Linggam Tat Prannamaami Sadaashiva Linggam॥8॥
Lingashtakam Idam Punnyam Yah Patthet Shiva Sannidhau।
Shivalokam Avaapnoti Shivena Saha Modate॥
|| Iti Shri Lingashtakam Sampurnam ||
ब्रह्मा मुरारी सदा शिवलिंगम विडियो | लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम् लिरिक्स(Lingashtakam)
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शिव लिंगाष्टकम स्तोत्रम् पाठ विधि क्या है ?
भगवन शिव तो एक बेलपत्र से प्रसन्न होने वाले देवता है, उनकी न कोई विधि है न नियम, परन्तु शिव लिंगाष्टकम स्तोत्र के विशेष फायदे शिव महापुराण में बताया गया है, जातक को प्रातः काल स्नान आदि से निवृत्त होकर शिव लिंग का अभिषेक और विधि विधान से पूजन करने के पश्चात् शांत भाव से सामने बैठकर श्री लिंगाष्टकम का पाठ 3 या 5 बार करना चाहिए।
लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम् के लाभ क्या है ?
श्री लिंगाष्टकम स्तोत्र का पाठ करने मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है जीवनकाल में सभी सुखों को भोगकर अंत में शिवलोक की प्राप्ति होती है।
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