गुरु गायत्री मंत्र अर्थ सहित / Guru Gayatri Mantra

गुरु गायत्री मंत्र अर्थ सहित Guru Gayatri Mantra

यदि आपको अध्यात्म की अनुभूति और जीवन में ब्रम्हज्ञान की प्राप्ति करनी है तो गुरु गायत्री मंत्र (Guru Gayatri Mantra) का जप अवश्य करें, क्यूंकि इस मंत्र के प्रतिदिन १०८ जाप करने से जो शांति और आध्यामिकता की जो शक्ति आपको मिलेगी वो आपको कही और नहीं मिलेगी। जिससे व्यक्ति का आध्यात्मिक शक्ति और सफर हमेशा आगे बढ़ता रहता है। यह न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन और स्थिरता लाने में भी सहायक है।

ॐ गुरुदेवाय विद्महे, परब्रह्माय धीमहि।
तन्नो गुरुः प्रचोदयात॥

।। ॐ शांतिः शांतिः शातिः ।।

जिस प्रकार गायत्री मंत्र के जाप से मनुष्य के जीवन में एकाग्रता आती है वैसे ही गुरु गायत्री मंत्र के जाप से साधक के जीवन में अज्ञानता, भ्रम और नकारात्मकता को समाप्त होती रहती है। यह मंत्र व्यक्ति के भीतर छिपी संभावनाओं को उजागर करता है। अर्थ हीन विचारों को दूर करता है सत्य और अनुशासन के मार्ग प्रशाष्ट करता है और आपके बुद्धि विवेक को तीव्र करता है। यदि आप सच्चे मन से अपने गुरु की शरण में जाये तो आपके सारे संकट और अज्ञानता समाप्त हो जाती है। तो आइये स्मरण करें और अपने जीवन को सार्थक बनाने में सहयोग करें :-


इस मंत्र के साथ सरह आप चाहें तो ॐ नमः पार्वती पतये हर हर महादेव महामंत्र o शिव पार्वती मंत्र o हनुमान मंत्र / दिव्य भक्ति मंत्र  o अखण्ड विष्णु कार्यम् मंत्र o सूर्य देव के 12 नाम और मंत्र जैसे लाभदायक मंत्रो को भी पढ़ सकते है। हम यहाँ नियमित रूप से मंत्र और आरतियों की श्रंखला और भजन कीर्तन साझा करते है इसलिए जुड़े रहे हमसे और अच्छा पढ़ें अच्छा सोचें।

स्नान: सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। उपयुक्त स्थान: जाप शुरू करने से पहले साफ-सुथरा और ध्यान के लिए उचित स्थान चुनें जहां आपको ध्यान करने में कोई बाधा न पहुंचा सके। आसन बैठकर: सबसे पहले आप सुखासन या पद्मासन में बैठें जाएँ। शुद्धि: ध्यान से पहले  हाथ धोकर, धुप और अगर्बत्ती से अपने चारों ओर की वातावरण की शुद्धि कर लें। दृष्टि स्थान: ध्यान भटके नहीं इसके लिए नासिकाग्र दृष्टि स्थान का चयन करें।

इससे आप का ध्यान किसी एक ही स्थान पर केंद्रित रहेगा और आपका ध्यान इससे भटकेगा नहीं। संकल्प: मन में संकल्प लें कि आप मंत्र जाप कर रहे हैं और इसके जाप से आप अपने अंतरात्मा तथा अध्यात्म से जुड़ना चाहतें है।  मंत्र जाप: अब आप मंत्र का जाप कर सकते है। माला का उपयोग करके मंत्र की जप गणना करें। इस मंत्र का जाप ध्यानपूर्वक और श्रद्धाभाव से करना चाहिए। जाप के समय मंत्र का अर्थ समझें और उसे याद करें। समाप्ति: अंत में गुरु को प्रणाम करें और अपने जीवन में सुख समृद्धि की प्रार्थना करें। इस प्रकार, नियमित जाप करने से आत्मा को ऊर्जा, ज्ञान, और शांति की प्राप्ति होती है।

गुरु गायत्री मंत्र के जाप करने से आपको निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते है

  1. आत्मिक शक्ति
  2. ब्रह्मज्ञान
  3. मानसिक शांति
  4. बुद्धिमत्ता
  5. आत्म-समर्पण
  6. विद्या
  7. आध्यात्मिक विकास
  8. सामाजिक संबंध
  9. रोग निवारण
  10. कल्याणकारी ऊर्जा

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