मंगला गौरी चालीसा / Mangala Gauri Chalisa

मंगला गौरी चालीसा / Mangala Gauri Chalisa

आज हम इस लेख में आपको मंगला गौरी चालीसा (Mangala Gauri Chalisa) का पाठ प्रस्तुत कर रहे है। जिसमे चल रहे श्रावण मास में मगला गौरी व्रत कथा में आप इसका स्मरण कर सकें। मंगला गौरी माता पार्वती के ही एक रूप में जिसमे माता विवाहित या अवविवाहित स्त्रियों को मनचाहा वर और पति की लम्बी आई के साथ सौभाग्य का आशीर्वाद प्रदान करती है। जो भी श्रावण माह में मंगला गौरी व्रत पूजन और स्तुति करती है उसके साथ मंगल ही मंगल होता है। तो आइये स्मरण करें मंगला गौरी चालीसा :-

॥ दोहा ॥

मन मंदिर मेरे आन बसो, आरम्भ करूं गुणगान।
गौरी माँ मातेश्वरी, दो चरणों का ध्यान॥

पूजन विधी न जानती, पर श्रद्धा है आपर।
प्रणाम मेरा स्विकारिये, हे माँ प्राण आधार॥

॥ चौपाई ॥

नमो नमो हे गौरी माता,
आप हो मेरी भाग्य विधाता।
शरनागत न कभी गभराता,
गौरी उमा शंकरी माता॥

आपका प्रिय है आदर पाता,
जय हो कार्तिकेय गणेश की माता।
महादेव गणपति संग आओ,
मेरे सकल कलेश मिटाओ॥

सार्थक हो जाए जग में जीना,
सत्कर्मो से कभी हटु ना।
सकल मनोरथ पूर्ण कीजो,
सुख सुविधा वरदान में दीज्यो॥

हे माँ भाग्य रेखा जगा दो,
मन भावन सुयोग मिला दो।
मन को भाए वो वर चाहु,
ससुराल पक्ष का स्नेह मैं पायु॥

परम आराध्या आप हो मेरी,
फिर क्यूं वर में इतनी देरी।
हमरे काज सम्पूर्ण कीजियो,
थोड़े में बरकत भर दीजियो॥

अपनी दया बनाए रखना,
भक्ति भाव जगाये रखना।
गौरी माता अनसन रहना,
कभी न खोयूं मन का चैना॥

देव मुनि सब शीश नवाते,
सुख सुविधा को वर में पाते।
श्रद्धा भाव जो लेकर आया,
बिन मांगे भी सब कुछ पाया॥

हर संकट से उसे उबारा,
आगे बढ़ के दिया सहारा।
जब भी माँ आप स्नेह दिखलावे,
निराश मन मे आस जगावे॥

शिव भी आपका कहा ना टाले,
दया दृष्टि हम पे डाले।
जो जन करता आपका ध्यान,
जग मे पाए मान सम्मान॥

सच्चे मन जो सुमिरन करती,
उसके सुहाग की रक्षा करती।
दया दृष्टि जब माँ डाले,
भव सागर से पार उतारे॥

जपे जो ओम नमः शिवाय,
शिव परिवार का स्नेहा वो पाए।
जिसपे आप दया दिखावे,
दुष्ट आत्मा नहीं सतावे॥

सात गुण की हो दाता आप,
हर इक मन की ज्ञाता आप।
काटो हमरे सकल कलेश,
निरोग रहे परिवार हमेश॥

दुःख संताप मिटा देना माँ,
मेघ दया के बरसा देना माँ।
जबही आप मौज में आय,
हठ जय माँ सब विपदाएं॥

जिस पे दयाल हो माता आप,
उसका बढ़ता पुण्य प्रताप।
फल-फूल मैं दुग्ध चढ़ाऊ,
श्रद्धा भाव से आपको ध्यायु॥

अवगुन मेरे ढक देना माँ,
ममता आंचल कर देना माँ।
कठिन नहीं कुछ आपको माता,
जग ठुकराया दया को पाता॥

बिन पाऊ न गुन माँ तेरे,
नाम धाम स्वरूप बहू तेरे।
जितने आपके पावन धाम,
सब धामो को माँ प्राणम॥

आपकी दया का है ना पार,
तभी को पूजे कुल संसार।
निर्मल मन जो शरण में आता,
मुक्ति की वो युक्ति पाता॥

संतोष धन्न से दामन भर दो,
असम्भव को माँ सम्भव कर दो।
आपकी दया के भारे,
सुखी बसे मेरा परिवार॥

आपकी महिमा अति निराली,
भक्तो के दुःख हरने वाली।
मनोकामना पुरन करती,
मन की दुविधा पल मे हरती॥

चालीसा जो भी पढ़े सुनाए,
सुयोग वर वरदान मे पाए।
आशा पूर्ण कर देना माँ,
सुमंगल साखी वर देना माँ॥

॥ दोहा ॥

गौरी माँ विनती करूँ, आना आपके द्वार।
ऐसी माँ कृपा कीजिये, हो जाए उद्धार॥

हीं हीं हीं शरण में, दो चरणों का ध्यान।
ऐसी माँ कृपा कीजिये, पाऊँ मान सम्मान॥

मंगला गौरी चालीसा का महत्व

जिस प्रकार हिन्दू धर्म में त्रिदेवों का महत्व है ठीक वैसे ही त्रिदेवियों का भी महत्व बताया गया है माता गौरी आधिशक्ति है त्रिदेवी में एक देवी है और उन्हें सृष्टि की जननी के रूप में भी पूजा जाता है यही कारण है गौरी चालीसा का महत्व अधिक माना गया है

मंगला गौरी चालीसा में माता के रूप और गुणों का अद्भुद वर्णन आपको मिलेगा और यही वर्णन हमारे जीवन में महत्व रखता है क्यूंकि जब आप गौरी चालीसा का पाठ करते है गौरी चालीसा के माध्यम से आपने माता गौरी के गुणों, महत्व, शक्तियों व कर्मों के बारे में जान लिया है। तो एक प्रकार से माता को पुकारते है और यही प्रार्थना माता को आपके प्रति आशीर्वाद देने के लिए प्रसन्न करती है ऐसे में हमें पवित्र मन के साथ प्रतिदिन माता गौरी की चालीसा का पाठ करना चाहिए।

गौरी चालीसा के लाभ

यदि किसी कन्या के विवाह में बार-बार अड़चन आ रही है, उसके विवाह में बिना किसी कारण विलंब हो रहा है, उसे अपनी इच्छा के अनुरूप वर चाहिए जो जीवन पर्यंत उसका साथ निभाए, तो उसे गौरी चालीसा का पाठ अवश्य कराएं इससे विवाह में आ रही हर प्रकार की अड़चन व ग्रह दोष दूर हो जाते हैं।

कई बार यह देखने में आता है कि व्यक्ति की कुंडली या ग्रहों की स्थिति इस प्रकार होती है कि उसका विवाह नहीं हो पाता है या विवाह के उपरांत भी अड़चन आती है। ऐसे में मनचाहा वर प्राप्त करने और विवाह बाद शांति से जीवनयापन करने के लिए हर स्त्री को मंगला गौरी चालीसा का पाठ करना चाहिए। पुरुष भी मनचाही स्त्री से विवाह करने के लिए गौरी जी की चालीसा का पाठ कर सकता है।


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