
मेरा तार हरी से जोड़े ऐसा कोई संत मिले भजन लिरिक्स
Mera taar hari se jode esa koi sant mile bhajan Lyrics
मेरा तार हरी से जोड़े ऐसा कोई संत मिले भजन लिरिक्स यह सुन्दर भजन इन्द्रेश जी महाराज के स्वर में गाया हुआ है और भजन के पद जो की एक कथावाचक और संगीतकार दोनों है बहुत सुन्दर और मधुर भजन (Mera taar hari se jode esa koi sant mile bhajan Lyrics) इन्द्रेश उपाध्याय जी के मधुर स्वर में लिरिक्स प्रस्तुत है तो आइये स्मरण करें इस मुग्ध कर देने वाले भजन को :-
Shri Indresh Upadhyay Ji Bhajan Lyrics
मेरा तार हरी से जोड़े,
ऐसा कोई संत मिले ॥
मेरा तार हरी से जोड़े,
ऐसा कोई संत मिले ॥
संत दरस के बड़े महातम,
दुर्लभ जग में संत समागम,
मेरे मन के भ्रम को तोड़े,
ऐसा कोई संत मिले,
मेरा तार हरि से जोडे,
ऐसा कोई संत मिले ॥
माया से जो दूर हटाए,
मन का जो अज्ञान मिटाएं,
मेरी बांह पकड़ ना छोडे,
ऐसा कोई संत मिले,
मेरा तार हरि से जोडे,
ऐसा कोई संत मिले ॥
कोई ऐसा संत मिलाएं,
भव तारण की राह दिखाए,
मुझे सद्गुण दे दे थोडे,
ऐसा कोई संत मिले,
मेरा तार हरि से जोडे,
ऐसा कोई संत मिले ॥
संगीत गायक – इन्द्रेश उपाध्याय जी (भक्तिपथ) (Swar Indresh ji maharaj)
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इन्द्रेश जी महाराज जो की प्रसिद्द कथावाचक कृष्णा चन्द्र शाश्त्री जी के पुत्र भी है, इन्द्रेश उपाध्याय जी एक प्रसिद्ध युवा कथावाचक हैं, जिन्होंने भागवत कथा, राम कथा, और सनातन धर्म को जनमानस तक पहुँचाने का कार्य पूरे समर्पण से किया है। पढ़ें इन्द्रेश उपाध्याय महाराज जीवन परिचय, कथा सेवा व भक्ति पथ के बारे में और इन्द्रेश जी महाराज भजन लिरिक्स



