101 गणेश जी के भजन लिरिक्स “गणेश चतुर्थी और गणेश उत्सव के लिए | Ganesh Bhajan Lyrics Collection

101 गणेश जी के भजन लिरिक्स "गणेश चतुर्थी और गणेश उत्सव के लिए | Ganesh Bhajan Lyrics Collection

गणेश चतुर्थी और भजन का महत्व

गणेश चतुर्थी, जिसे विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है। यह दिन भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। गणपति बप्पा को विघ्नहर्ता और सिद्धिदाता माना जाता है, जो अपने भक्तों के जीवन से बाधाओं को दूर कर सफलता और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं। (Ganesh Bhajan Lyrics) इस दिन भक्तजन घरों और पंडालों में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर भक्ति भाव से पूजा-अर्चना करते हैं। भजन और आरती गाना इस उत्सव का मुख्य अंग होता है, क्योंकि भजनों के माध्यम से भक्त भगवान गणेश के प्रति अपनी श्रद्धा और भावनाओं को व्यक्त करते हैं।

भजन का महत्व सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे मन को शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है। गणेश उत्सव के दौरान गाए जाने वाले भजन भक्तों में भक्ति भाव जगाते हैं और सामूहिक रूप से गाए जाने पर यह उत्सव को और भी भव्य और दिव्य बना देते हैं। इसीलिए, गणेश चतुर्थी और गणेश उत्सव पर गणपति जी के भजन गाना भक्ति, शांति और आनंद का अद्भुत अनुभव कराता है।

101 गणेश जी के भजन लिरिक्स | Ganesh Bhajan Lyrics Collection

पूजन आरंभ करने से पहले सर्वप्रथम पूज्य गणेश जी की स्तुति और स्मरण किया जाता है क्यूंकि शास्त्रों में लिखित है गणेश मंत्र के स्मरण मंत्र से आपके कार्य की सफलता निश्चित हो जाती है इसलिए तो गणेश जी विघ्नहर्ता कहा जाता है तो आइये स्मरण करें वक्रतुण्ड महाकाय – गणेश मंत्र :-

वक्रतुण्ड महाकाय
सूर्यकोटि समप्रभ ।

निर्विघ्नं कुरु मे देव
सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

हिंदी भावार्थ एवं रूपांतरण

वक्रतुण्ड: घुमावदार सूंड
महाकाय: महा काया, विशाल शरीर
सूर्यकोटि: सूर्य के समान
समप्रभ: महान प्रतिभाशाली
निर्विघ्नं: बिना विघ्न
कुरु: पूरे करें
मे: मेरे
देव: प्रभु
सर्वकार्येषु: सारे कार्य
सर्वदा: हमेशा, सदैव

घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर काय, करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली।
मेरे प्रभु, हमेशा मेरे सारे कार्य बिना विघ्न के पूरे करें (करने की कृपा करें)॥

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जय गणेश जय गजवदन,
कृपा सिंधु भगवान ।
मूसक वाहन दीजिये,
ज्ञान बुद्धि वरदान ॥1॥

शिव नंदन गौरी तनय,
प्रथम पूज्य गणराज ।
सकल अमंगल को हरो,
पूरण हो हर काज ॥2॥

हाथ जोड़ विनती करूँ,
देवों के सरताज ।
भव बाधा सब दूर हो,
ऋद्धि सिद्धि गणराज ॥3॥

मंगलकारी देव तुम,
मंगल करो गणेश ।
जग वंदन तुम्हरे करें,
काटो सबका क्लेश ॥4॥

गिरिजा पुत्र गणेश की,
बोलो जय-जयकार ।
गणपति मेरे देव तुम,
देवों के सरकार ॥5॥

मूसक वाहन साजते,
एक दन्त भगवान ।
नमन करूँ गणदेव जी,
आओ बुद्धि निधान ॥6॥

प्रथम पुज्य वन्दन करूँ,
महादेव के लाल ।
ऋद्धि सिद्धि दाता तुम्हीं,
तुम हो दीनदयाल ॥7॥

देवों के सरताज हो,
ज्ञान वान गुणवान ।
गणपति बप्पा मोरिया,
लीला बड़ी महान ॥8॥

तीन लोक चौदह भुवन,
तेरी जय-जयकार ।
हे गणपति गणदेवता,
हर लो दुःख अपार ॥9॥

सुर नर मुनि सब हैं भजे,
तुमको हे शिव लाल ।
प्रमुदित माता पार्वती,
जय हो दीन दयाल ॥10॥

कैलाशी शिव सुत सुनो,
करो भक्त कल्याण ।
सब जन द्वारे आ खड़ा,
आज बचालो प्राण ॥11॥

महादेव के लाल तुम,
सभी झुकाते शीष ।
हम निर्धन लाचार हैं,
दो हमको आशीष ॥12॥

गणनायक हे शंभु सुत,
विघ्न हरण गणराज ।
सकल क्लेश संताप को,
त्वरित मिटा दो आज ॥13॥

वक्रतुंड शुचि शुंड है,
तिलक त्रिपुंडी भाल ।
छबि लखि सुर नर आत्मा,
शिव गौरी के लाल ॥14॥

उर मणिमाला शोभते,
रत्न मुकुट सिर साज ।
मोदक हाथ कुठार है,
सुन्दर मुख गणराज ॥15॥

पीताम्बर तन पर सजे,
चरण पादुका धार ।
धनि शिव ललना सुख भवन,
मेरे तारणहार ॥16॥

ऋद्धि सिद्धि पति शुभ सदन,
महिमा अमिट अपार ।
जन्म विचित्र चरित्र है,
मूसक वाहन द्वार ॥17॥

एक रदन गज के बदन,
काया रूप विशाल ।
पल में हरते दुःख को,
हे प्रभु दीन दयाल ॥18॥

माता गौरा के तनय,
ज्ञान बुद्धि भण्डार ।
गहे शरण प्रभु राखिये,
हम हैं दीन अपार ॥19॥

शिवा शंभु के लाल तुम,
करुणा बड़े निधान ।
विपदा में संसार है,
हरो कष्ट भगवान ॥20॥

– बोधन राम निषादराज `विनायक`

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जय देव जय देव,
जय मंगल मूर्ति ।
दर्शनमात्रे मनः,
कामना पूर्ति
जय देव जय देव ॥

रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा ।
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा ।
हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा ।
रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया ।
जय देव जय देव..

जय देव जय देव,
जय मंगल मूर्ति ।
दर्शनमात्रे मनः,
कामना पूर्ति
जय देव जय देव ॥

लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना ।
सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना ।
दास रामाचा वाट पाहे सदना ।
संकटी पावावे निर्वाणी, रक्षावे सुरवर वंदना ।
जय देव जय देव..

जय देव जय देव,
जय मंगल मूर्ति ।
दर्शनमात्रे मनः,
कामना पूर्ति
जय देव जय देव ॥

॥ श्री गणेशाची आरती ॥
शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको ।
दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहरको ।
हाथ लिए गुड लड्डू सांई सुरवरको ।
महिमा कहे न जाय लागत हूं पादको ॥
जय देव जय देव..

जय देव जय देव,
जय जय श्री गणराज ।
विद्या सुखदाता
धन्य तुम्हारा दर्शन
मेरा मन रमता,
जय देव जय देव ॥

अष्टौ सिद्धि दासी संकटको बैरि ।
विघ्नविनाशन मंगल मूरत अधिकारी ।
कोटीसूरजप्रकाश ऐबी छबि तेरी ।
गंडस्थलमदमस्तक झूले शशिबिहारि ॥
जय देव जय देव..

जय देव जय देव,
जय जय श्री गणराज ।
विद्या सुखदाता
धन्य तुम्हारा दर्शन
मेरा मन रमता,
जय देव जय देव ॥

भावभगत से कोई शरणागत आवे ।
संतत संपत सबही भरपूर पावे ।
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे ।
गोसावीनंदन निशिदिन गुन गावे ॥
जय देव जय देव..

जय देव जय देव,
जय जय श्री गणराज ।
विद्या सुखदाता
धन्य तुम्हारा दर्शन
मेरा मन रमता,
जय देव जय देव ॥

॥ श्री शंकराची आरती ॥
लवथवती विक्राळा ब्रह्मांडी माळा,
वीषे कंठ काळा त्रिनेत्री ज्वाळा
लावण्य सुंदर मस्तकी बाळा,
तेथुनिया जळ निर्मळ वाहे झुळझुळा ॥
जय देव जय देव..

जय देव जय देव,
जय श्रीशंकरा ।
आरती ओवाळू,
तुज कर्पुरगौरा
जय देव जय देव ॥

कर्पुरगौरा भोळा नयनी विशाळा,
अर्धांगी पार्वती सुमनांच्या माळा
विभुतीचे उधळण शितकंठ नीळा,
ऐसा शंकर शोभे उमा वेल्हाळा ॥
जय देव जय देव..

जय देव जय देव,
जय श्रीशंकरा ।
आरती ओवाळू,
तुज कर्पुरगौरा
जय देव जय देव ॥

देवी दैत्यी सागरमंथन पै केले,
त्यामाजी अवचित हळहळ जे उठले
ते त्वा असुरपणे प्राशन केले,
नीलकंठ नाम प्रसिद्ध झाले ॥
जय देव जय देव..

जय देव जय देव,
जय श्रीशंकरा ।
आरती ओवाळू,
तुज कर्पुरगौरा
जय देव जय देव ॥

व्याघ्रांबर फणिवरधर सुंदर मदनारी,
पंचानन मनमोहन मुनिजनसुखकारी
शतकोटीचे बीज वाचे उच्चारी,
रघुकुलटिळक रामदासा अंतरी ॥
जय देव जय देव..

जय देव जय देव,
जय श्रीशंकरा ।
आरती ओवाळू,
तुज कर्पुरगौरा
जय देव जय देव ॥

॥ श्री देवीची आरती ॥
दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी,
अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी ।
वारी वारीं जन्ममरणाते वारी,
हारी पडलो आता संकट नीवारी ॥
जय देवी जय देवी..

जय देवी जय देवी,
जय महिषासुरमथनी ।
सुरवर-ईश्वर-वरदे,
तारक संजीवनी
जय देवी जय देवी ॥

त्रिभुवनी भुवनी पाहतां तुज ऎसे नाही,
चारी श्रमले परंतु न बोलावे काहीं ।
साही विवाद करितां पडिले प्रवाही,
ते तूं भक्तालागी पावसि लवलाही ॥
जय देवी जय देवी..

जय देवी जय देवी,
जय महिषासुरमथनी ।
सुरवरईश्वरवरदे,
तारक संजीवनी
जय देवी जय देवी ॥

प्रसन्न वदने प्रसन्न होसी निजदासां,
क्लेशापासूनि सोडी तोडी भवपाशा ।
अंवे तुजवांचून कोण पुरविल आशा,
नरहरि तल्लिन झाला पदपंकजलेशा ॥
जय देवी जय देवी..

जय देवी जय देवी,
जय महिषासुरमथनी ।
सुरवरईश्वरवरदे,
तारक संजीवनी
जय देवी जय देवी ॥

॥ घालीन लोटांगण आरती ॥
घालीन लोटांगण, वंदीन चरण ।
डोळ्यांनी पाहीन रुप तुझें ।
प्रेमें आलिंगन, आनंदे पूजिन ।
भावें ओवाळीन म्हणे नामा ॥

त्वमेव माता च पिता त्वमेव ।
त्वमेव बंधुक्ष्च सखा त्वमेव ।
त्वमेव विध्या द्रविणं त्वमेव ।
त्वमेव सर्वं मम देवदेव ॥

कायेन वाचा मनसेंद्रीयेव्रा,
बुद्धयात्मना वा प्रकृतिस्वभावात ।
करोमि यध्य्त सकलं परस्मे,
नारायणायेति समर्पयामि ॥

अच्युतं केशवं रामनारायणं,
कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम ।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं,
जानकीनायकं रामचंद्र भजे ॥

हरे राम हर राम,
राम राम हरे हरे ।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण,
कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।

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दुखहर्ता बनके,
सुखकर्ता बनके,
चले आना,
गणपति चले आना ॥

तुम विघ्न विनाशक आना,
तुम विघ्न विनाशक आना,
इक्छा पूरी करो,
हाथ सर पे धरो,
चले आना,
गणपति चले आना,
दुख हर्ता बनके,
सुखकर्ता बनके,
चले आना,
गणपति चले आना ॥

तुम अष्टविनायक आना,
तुम अष्टविनायक आना,
मोदक हाथ लेके,
खुशियां साथ लेके,
चले आना,
गणपति चले आना,
दुख हर्ता बनके,
सुखकर्ता बनके,
चले आना,
गणपति चले आना ॥

तुम भाग्य विधाता आना,
तुम भाग्य विधाता आना,
रिद्धि साथ लेके,
सिद्धि साथ लेके,
चले आना,
गणपति चले आना,
दुख हर्ता बनके,
सुखकर्ता बनके,
चले आना,
गणपति चले आना ॥

तुम गौरी नन्दन आना,
तुम गौरी नन्दन आना,
वर्षा दया की करो,
दुःख सबके हरो,
चले आना,
गणपति चले आना,
दुखहर्ता बनके,
सुखकर्ता बनके,
चले आना,
गणपति चले आना ॥

तुम मंगल मूरत आना,
तुम मंगल मूरत आना,
आस तोड़े नहीं,
साथ छोड़ो नहीं,
चले आना,
गणपति चले आना,
दुखहर्ता बनके,
सुखकर्ता बनके,
चले आना,
गणपति चले आना ॥

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वक्रतुण्ड महाकाय,
सूर्यकोटि समप्रभ:,
निर्विघ्नं कुरु मे देव,
सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

पूजा होती है आपकी,
हे सिद्धि के दाता सर्वदा,
जय हो आपकी।
आप घर आए मेरे,
हम पर कृपा हुई,
हम सब भक्तो की बप्पा,
दुनिया ही गुलशन हुई।
अपनी दया की दृष्टि से,
किरपा करो सब भक्तो पर,
सेवा करेंगे हम सभी,
आकर के तेरी चौखट पर ॥

सजा दो घर को फूलों से,
मेरे गणराज आये है,
लगे कुटिया भी दुल्हन सी,
देव सरताज आए है,
सजा दो घर को फूलों से,
मेरे गणराज आए है ॥

नयन गंगा बहाकर के,
पखारों इनके चरणों को,
मेरे गणराया के संग संग,
मेरे गणराया के संग संग,
ये मूषकराज आए है,
सजा दो घर को फूलों से,
मेरे गणराज आए है ॥

कभी रीझे ना ये धन पे,
पुकारा हमने है मन से,
दुखो को दूर कर सबके,
दुखो को दूर कर सबके,
बचाने लाज आए है,
सजा दो घर को फूलों से,
मेरे गणराज आए है ॥

उमड़ आई मेरी अँखियाँ,
देखकर अपने बप्पा को,
हमारी बिगड़ी किस्मत को,
हमारी बिगड़ी किस्मत को,
बनाने आज आए है,
सजा दो घर को फूलों से,
मेरे गणराज आए है ॥

सजा दो घर को फूलों से,
मेरे गणराज आये है,
लगे कुटिया भी दुल्हन सी,
देव सरताज आए है,
सजा दो घर को फूलों से,
मेरे गणराज आए है ॥

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ओ गणनायक महाराज सुमिरा जोडू दोनों हाथ,
ओ गणनायक महाराज,
सुमिरा जोडू दोनों हाथ,
गजानंद मैहर करो,
गजानन मैहर करो ॥

एकदंत है दयावंत है,
चारो भुजाओ वाले,
एकदंत है दयावंत है,
चारो भुजाओ वाले,
लम्बोदर रिद्धि सिद्धि दाता,
विघ्न मिटाने वाले,
लम्बोदर रिद्धि सिद्धि दाता,
विघ्न मिटाने वाले,
लाये मोदक भर भर थाल,
जिमो शिव गौरी के लाल,
गजानन मैहर करो,
गजानन मैहर करो ॥

गणपति बाप्पा मोरेया मंगल मूर्ति मोरेया ॥
अद्भुत तेरा रूप गजानन,
अद्भुत तेरी माया,
अद्भुत तेरा रूप गजानन,
अद्भुत तेरी माया,
मात पिता की सेवा कर,
वरदान अनोखा पाया,
मात पिता की सेवा कर,
वरदान अनोखा पाया,
बन गए देवो में सिरमौर,
तुझ बिन मिले ना कोई ठौर,
गजानंद मैहर करो, गजानन मैहर करो ॥

गणपति बाप्पा मोरेया मंगल मूर्ति मोरेया ॥
अगर किसी ने भूल आपको,
कारज कोई बनाया,
अगर किसी ने भूल आपको,
कारज कोई बनाया,
विघ्न हुए कारज सब अटके,
कोई काम ना आया,
विघ्न हुए कारज सब अटके,
कोई काम ना आया,
तुमसे हार गया संसार,
तेरी महिमा अपरंपार,
गजानंद मैहर करो,
गजानन मैहर करो।।

गणपति बाप्पा मोरेया मंगल मूर्ति मोरेया ॥
नंदू मिलकर भक्त श्याम का,
तुमको प्रथम मनाये,
नंदू मिलकर भक्त श्याम का,
तुमको प्रथम मनाये,
बरसे रंग कृपा का तेरा,
जब हम श्याम रिझाये,
बरसे रंग कृपा का तेरा,
जब हम श्याम रिझाये,
वंदन तेरा हे गणराज,
रखना श्याम भक्त की लाज,
गजानंद मैहर करो, गजानन मैहर करो ॥

ओ गणनायक महाराज,
सुमिरा जोडू दोनों हाथ,
गजानंद मैहर करो,
गजानन मैहर करो ॥
गणपति बाप्पा मोरेया मंगल मूर्ति मोरेया ॥

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संकट हरलो मंगल करदो,
प्यारे शिव गौरा के लाल,
अब विनती सुनलो गणपति देवा ॥

हे गणनायक देव गजानन,
मूषक चढ़कर आओ,
हाथ जोड़कर द्वार खड़े है,
अब ना देर लगाओ,
गजानन जल्दी से तुम आओ,
आकर के अपने भक्तों का,
तुम जान लो दिल का हाल,
अब विनती सुनलो गणपति देवा ॥

तुमको ना बतलाए तो हम,
अपनी किसे बताएं,
तुम ही बता दो सिद्धिविनायक,
किसके द्वार पे जाए,
बताओ किसको अपनी सुनाएं,
दुःख के बादल ने घेरा हमें,
संकट का फैला जाल,
अब विनती सुनलो गणपति देवा ॥

संकटहर्ता संकट काटो,
चारो तरफ तेरा राज,
कर दो अब खुशियों की वर्षा,
हे गणपति महाराज,
हमारे पूरण कर दो काज,
सबके पूरण तुम काम करो,
जग में है तेरी मिसाल,
अब विनती सुनलो गणपति देवा ॥

टूट रही है आस की डोरी,
डोल रहा विश्वास,
अब तो हमें तुम अपनी दया का,
दे दो प्रभु प्रसाद,
कहीं अब टूट ना जाए आस,
जैसे भी हो अब तो तुमको,
देवा करना है कमाल,
अब विनती सुनलो गणपति देवा ॥

संकट हरलो मंगल करदो,
प्यारे शिव गौरा के लाल,
अब विनती सुनलो गणपति देवा ॥

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