दास रघुनाथ का नन्द सुत का सखा भजन लिरिक्स / Das Raghunath Ka Nand Sut Ka Sakha Bhajan Lyrics

दास रघुनाथ का नन्द सुत का सखा भजन लिरिक्स Das Raghunath Ka Nand Sut Ka Sakha Bhajan Lyrics

इन्द्रेश जी महाराज जो की प्रसिद्द कथावाचक कृष्णा चन्द्र शाश्त्री जी के पुत्र भी है, इन्द्रेश उपाध्याय जी एक प्रसिद्ध युवा कथावाचक हैं, जिन्होंने भागवत कथा, राम कथा, और सनातन धर्म को जनमानस तक पहुँचाने का कार्य पूरे समर्पण से किया है। पढ़ें इन्द्रेश उपाध्याय महाराज जीवन परिचय, कथा सेवा व भक्ति पथ के बारे में और इन्द्रेश जी महाराज भजन लिरिक्स

Shri Indresh Ji Maharaj Bhajan Lyrics

दास रघुनाथ का नन्द सुत का सखा,
कुछ इधर भी रहा कुछ उधर भी रहा,
सुख मिला श्री अवध और बृजवास का,
कुछ इधर भी रहा कुछ उधर भी रहा,

मैथली ने कभी मोद मोदक दिया,
राधिका ने कभी गोद में ले लिया,
मात सत्कार में मस्त होके सदा,
कुछ इधर भी रहा कुछ उधर भी रहा,

खूब ली है प्रसादी अवध राज की,
खूब जूठन मिली यार बृजराज की,
भोग मोहन चखा दूध माखन चखा,
कुछ इधर भी रहा कुछ उधर भी रहा,

उस तरफ द्वार दरबान हु राज का,
इस तरफ दोस्त हु दानी सिरताज का,
घर रखता हुआ जर लुटता हुआ,
कुछ इधर भी रहा कुछ उधर भी रहा,

कोई नर या इधर या उधर ही रहा,
कोई नर या इधर ना उधर ही रहा,
बिन्दु दोनों तरफ ले रहा है मजा,
कुछ इधर भी रहा कुछ उधर भी रहा.

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे,

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे,

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संगीत गायक – इन्द्रेश उपाध्याय जी (भक्तिपथ) (Swar Indresh ji Maharaj)


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