आज की प्रेरक कहानी निर्भर है हमारे अश्तित्व,और हमारे इर्द गिर्द होने वाले और न जानते हुए भी जो हमारे जीवन में निहित है वो है पंचमहाभूत, तो आज की कहानी शीर्षक है “पंचमहाभूतों का करें सम्मान” तो आइये पढ़ें और समझें:-
पंचमहाभूतों का करें सम्मान | प्रेरक कहानियाँ | Panch Mahabhoot
कुछ वर्षों पूर्व जब नया-नया ज्योतिष सीख रहा था उन दिनों की बात है, एक सुबह जब मैं बाथरूम में नहाने गया तो पानी की बाल्टी जो बीच में पड़ी थी उसे पैर से एक तरफ सरका दिया।
बालटी में भरे पानी को देखकर …मुझे अपनी भूल का अहसास हुआ पानी जो चन्द्रमा ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है और पंचमहाभूतों में जल तत्व इस जगत का जीवन है और हम सबके लिए पूजनीय है उसे पैर लगाना मुझे अपनी ग़लती का अहसास हुआ और उसी समय मैंने पानी से भरी हुई बालटी से माफी माँगी और दुबारा कभी भविष्य में ऐसी ग़लती नहीं करूँगा ये निश्चय किया।
जल- वायु- अग्नि- पृथ्वी और आकाश इन पंचमहाभूतों से मिलकर इस सृष्टि की रचना हुई है और यही हमारे जीवन का आधार है। इन पंच शक्तियों से ही तो हमारा अस्तित्व है।
घर- भवन इत्यादि में इनका उचित स्थान वास्तु शास्त्र का प्रमुख प्रयोजन है। अगर कोई व्यक्ति इन प्राकृतिक शक्तियों का सम्मान करता है इनके प्रति श्रद्धा भाव रखता है यक़ीन मानिए उसके घर के सभी वास्तु दोष स्वत: ही दुर हो जाते हैं।
- जब भी जल का पान करे या उपयोग करें उसे जल देवता मानकर उसके प्रति आदर का भाव ज़रूर रखें और जल का कभी भी भूलकर दुरुपयोग ना करें।
- वायु जो इस जगत का प्राण है इसे दूषित होने से रोकने का हर संभव प्रयास करें … व हवन यज्ञ मंत्र उच्चारण से शुद्ध रखने की कोशिश करें।
- अग्नि जिसकी ऊर्जा से इस सृष्टि को गति व प्रकाश मिलता है जब भी कहीं प्रज्वलित अग्नि को देखें उसे श्रध्दा भाव से नमन करें। हर सुबह जब भी सूर्य के दर्शन करें उसे प्रणाम करना कभी नहीं भूले।
- पृथ्वी जिसके द्वारा हमें यह शरीर प्राप्त हुआ है भोजन और रहने के लिए स्थान मिला है उसका ऋण हम कभी नहीं चुका सकते इसे स्वच्छ व हरा भरा रखने का प्रयत्न करें। ऐसी वस्तुओं का उपयोग करने से बचें जो पृथ्वी की उर्वरा शक्ति को क्षीण करते हैं, जैसे कि प्लास्टिक इत्यादि। और प्रातः काल पलंग से उठते ही पृथ्वी पर पैर रखने से पूर्व पृथ्वी को प्रणाम अवश्य करें।
- आकाश जो सभी तत्वों का केन्द्र है और सर्वशक्तिशाली है ध्यान रखें इसकी उपेक्षा करने की ग़लती कभी नहीं होनी चाहिए, जब भी आकाश की तरफ़ देखें श्रद्धा से आँखें झुकाकर इसका अभिवादन करें।
जो मनुष्य इन पंचमहाभूतों का आदर करता है और इनके प्रति कृतज्ञता का भाव रखता है, प्राकृतिक शक्तियों उसकी दास हो जाती है और फिर उसके लिए कुछ भी करना असंभव नहीं है।
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- जो हमें नहीं मिलता, वही हमें वह बनाता है, जो हम बनने के लिए जन्मे हैं। | प्रेरक कहानियाँ
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