गजाननं भूत गणादि सेवितं श्री गणेश मंत्र | Om Gajananam Bhoota Ganadhi Sevitam Mantra

गजाननं भूत गणादि सेवितं श्री गणेश मंत्र Om Gajananam Bhoota Ganadhi Sevitam Mantra

गजाननं भूत गणादि सेवितं – माता पार्वती और शंकर भगवान के पुत्र प्रथम पूज्य श्री गणेश, एकदंत, विघ्नहर्ता, शुभकर्ता है। हमारे सनातन धर्म में किसी भी शुभकार्य के प्रारंभ में भगवान गणेश जी का प्रथम स्मरण अनिवार्य माना जाता है। जिस प्रकार हम वक्रतुंड महाकाय श्री गणेश मंत्र का उच्चारण करते है ठीक उसी प्रकार इस मंत्र का जप कर सकते है। तो आइए स्मरण करें श्री गणेश मंत्र

गजाननं भूत गणादि सेवितं,
कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम् ।
उमासुतं शोक विनाशकारकम्,
नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम् ॥

गजाननं भूतगणाधिसेवितं,
कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम् ।
उमासुतं शोकविनाशकारकम्न,
मामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम् ॥

श्री गणेश मंत्र (मूल रूप संस्कृत में)

श्री गणेश मंत्र गजाननं भूत गणादि सेवितं भावार्थ

हे प्रभु हांथी के सामान मुख वाले, भूत और गण भी के द्वारा पूजे जाने वाले, स्वादिष्ट बेल और जामुन के फल खाने वाले, माता उमा पार्वती के पुत्र, सभी दुखों का नाश करने वाले, सभी के दुःख और बाधाओं का निवारण श्री गणेश जी के चरणों को प्रणाम और नमन करता / करती हूँ।

इस प्रकार गणेश जी की वंदना करने से भगवान प्रसन्न होते है। और आशीर्वाद देते है। आपको बता दें कि यह स्तोत्र गणेश चालीसा और गणेश स्तुतियों में महत्वपूर्ण मन जाता है जिसका सभी शुभ कार्यों में उच्चारण किया जाता है। जिससे सभी कार्य सिद्ध होते है।


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