शंख स्तुति मंत्र | Shankh Mantra | शंख पूजा स्तोत्र

शंख स्तुति मंत्र | Shankh Mantra | शंख पूजा स्तोत्र

Shankh Mantra – शंख केवल एक पूजन वस्तु नहीं है, बल्कि यह धर्म, शुद्धता और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है। जब शंख स्तुति मंत्र का जप श्रद्धा और नियम से किया जाता है, तो यह हमारे जीवन से नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मकता, शांति और आध्यात्मिक शक्ति का संचार करता है।

जिस प्रकार शंखनाद से वातावरण पवित्र हो जाता है, उसी प्रकार शंख मंत्र का नियमित स्मरण मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करता है। यदि आप अपने जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति चाहते हैं, तो शंख मंत्र को अपनी दैनिक साधना का हिस्सा अवश्य बनाएं।

शंखं चंद्रार्क दैवत्यं मध्ये वरुण दैवतम् ।
पृष्ठे प्रजापति विद्यात् अग्रे गंगा सरस्वती ॥
त्वं पुरा सागरोत्पन्नः विष्णुना विधृतः करे ।
पूजितः सर्व देवैश्च पंचजन्य नमोऽस्तु ते ॥

शंख स्तुति मंत्र का भावार्थ – Shankh Mantra

शंखं चंद्रार्क दैवत्यं मध्ये वरुण दैवतम् ।
शंख में चंद्रमा और सूर्य के समान दिव्य शक्तियाँ निवास करती हैं तथा उसके मध्य भाग में वरुण देव का वास होता है।

पृष्ठे प्रजापति विद्यात् अग्रे गंगा सरस्वती ॥
शंख के पीछे की ओर प्रजापति का निवास है और आगे की ओर गंगा व सरस्वती जैसी पवित्र नदियाँ विराजमान हैं।

त्वं पुरा सागरोत्पन्नः विष्णुना विधृतः करे ।
हे शंख! आप प्राचीन काल में समुद्र मंथन से उत्पन्न हुए और स्वयं भगवान विष्णु ने आपको अपने कर-कमलों में धारण किया।

पूजितः सर्व देवैश्च पंचजन्य नमोऽस्तु ते ॥
आप सभी देवताओं द्वारा पूजित हैं। हे पंचजन्य शंख! आपको बार-बार नमन है।

शंख मंत्र – पूजन में उपयोग की विधि

शंख को पूजन में अत्यंत पवित्र माना गया है। शंख मंत्र के साथ किया गया पूजन शीघ्र फलदायी होता है।

शंख पूजन की विधि

  1. शुद्धिकरण
    प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
  2. शंख की स्थापना
    शंख को लाल या पीले कपड़े पर रखें। शंख का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखें।
  3. जल भरना
    शंख में गंगाजल या स्वच्छ जल भरें। चाहें तो तुलसी पत्र या चंदन डाल सकते हैं।
  4. आह्वान मंत्र
    शंख में देवताओं का आवाहन करने हेतु शंख मंत्र का एक बार भावपूर्वक पाठ करें।
  5. अभिषेक / अर्घ्य
    शंख के जल से भगवान विष्णु, शिव या सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  6. शंखनाद
    पूजन के अंत में एक बार शंखनाद करें—यह वातावरण को नकारात्मक शक्तियों से मुक्त करता है।
  7. प्रसाद व आरती
    दीप, धूप, पुष्प अर्पित कर आरती करें और अंत में शंख को सम्मानपूर्वक रखें।

शंख मंत्र जप करने के लाभ

शंख मंत्र का जप केवल धार्मिक नहीं, बल्कि मानसिक, आध्यात्मिक और ऊर्जात्मक लाभ भी देता है।

प्रमुख लाभ

  • घर और मन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
  • देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है
  • मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ती है
  • वास्तु दोष और ग्रह दोष में कमी आती है
  • धन, सौभाग्य और समृद्धि का मार्ग खुलता है
  • जल तत्व शुद्ध होता है (शंख में रखा जल अमृत तुल्य माना गया है)
  • पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है

जप करने का उत्तम समय

  • प्रातः ब्रह्ममुहूर्त या
  • विष्णुवार, एकादशी, पूर्णिमा
  • स्नान के बाद, शांत मन से

जप संख्या

  • 11, 21 या 108 बार
    (संभव हो तो शंख के सामने बैठकर)

विशेष श्रद्धा भाव

जहाँ शंख का नाद गूंजता है,
वहाँ अशुभ टिक नहीं पाता।


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