सुंदरकांड प्रारंभ करने से पहले श्री रामचरितमानस की कुछ सिद्ध चौपाइयां इस प्रकार है:

सुंदरकांड प्रारंभ करने से पहले श्री रामचरितमानस की कुछ सिद्ध चौपाइयां इस प्रकार है

सुन्दरकाण्ड के विषय में मुझे लगता है किसी भी सनातनी को समझाने की आवश्यकता नहीं है, क्यूंकि यह इस्तना पविता और शक्तिशाली पाठ है कि इसके पढने मात्र से ही साड़ी नकारात्मकता स्वयं ही दूर होने लगती है तो आइये आपको बताते है सुंदरकांड प्रारंभ करने से पहले श्री रामचरितमानस की कुछ सिद्ध चौपाइयां इस प्रकार है:

  • मंगल भवन अमंगल हारी।
    द्रवहु सो दशरथ अज रबि हारी।।
  • रामकथा के तेही अधिकारी।
    जिनके सतसंगत अधिकारी।।
  • प्रबिसि नगर कीजे सब काजा।
    हृदय राखी कौशलपुर राजा ।।
  • सीताराम चरण रति मोरी।
    अनदिन बढ़ऊं अनुग्रह तोरी ।।
  • सियाराम मय सब जग जानी।
    करऊं प्रणाम जोरि जुग पानी ।।
  • जेहि बिधि नाथ होईहित मोरा।
    करऊं सो बेगी, दास में तोरा।।
  • उमा कहूं मैं अनुभव अपना।
    सत हरिभजन जगतसब सपना।।
  • जासु नाम सुमिरत एक बारा।
    उत्तरही नर भव सिंधु अपारा ।।
  • हनुमान सम नहीं बड़भागी।
    नहीं कोई राम चरण अनुरागी।।
  • कलयुग केवल नाम अधारा।
    सुमिर सुमिर नर उतरीं पारा।।

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