Motivational Story – चाहतें कभी कम नहीं होती।

कभी-कभी हम सोचते हैं—
“हमने इतना अच्छा किया, फिर भी हमें वो नहीं मिला जो हम deserve करते थे।”
नौकरी में मेहनत की — प्रमोशन किसी और को मिला।
रिश्तों में सच्चाई रखी — पर हमें धोखा मिला।
दूसरों का भला चाहा —पर बदले में बुराई या ताने मिले।

मन कहता है — “क्यों राम जी? मैं ही मिला था-दुख देने के लिए? मेरे साथ ही ऐसा क्यों किया ”
जो हमें नहीं मिला, वो भी एक योजना थी – उस ईश्वर की।

जब श्रीराम का राजतिलक तय था, सारी अयोध्या खुश थी।
ढोल, नगाड़े बज रहे थे, पुष्पवर्षा हो रही थी।उत्सव का माहौल था।
और उसी रात —वनवास का संदेश आ गया।

एक क्षण में सब कुछ ख़त्म हो गया —राज्य, सिंहासन, सुख, प्रतिष्ठा- सब कुछ।
अगर उस दिन राम सोचते — “मैं तो राजगद्दी deserve करता था!”
तो शायद वो सिर्फ राजा रहते, भगवान न बनते।

कभी-कभी जो हम चाहते हैं, वो हमें इसलिए नहीं मिलता,
क्योंकि भगवान हमें उससे कहीं बड़ा देने वाले होते हैं।

अगर रामजी को गद्दी मिल जाती, तो लंका पर विजय, विभीषण का उद्धार, हनुमानजी का गौरव — ये सब कहाँ होता?

कभी-कभी “ना मिलना” ही हमारे जीवन का सबसे बड़ा मोड़ बन जाता है।

हम सोचते हैं —
“काश मुझे वो नौकरी मिल जाती, पर वो मिली नहीं-वो शायद तुम्हें बाँध देती।
“काश वो रिश्ता टिक जाता-पर शायद वो रिश्ता तुम्हें तोड़ देता।

भगवान वो नहीं देते जो हम माँगते हैं, बल्कि वो देते हैं जो हमारे लिए सही है।

तो जब अगली बार मन में आए —
“मुझे वो क्यों नहीं मिला?” तो बस याद रखना —
रामजी को भी पहले वनवास मिला था, पर वही वनवास उन्हें सम्पूर्ण विश्व का आदर्श बना गया।

जो हमें नहीं मिलता, वही हमें वह बनाता है, जो हम बनने के लिए जन्मे हैं।

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