वैशाख पूर्णिमा को पीपल पूर्णिमा/ बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस बार पीपल पूर्णिमा 01 मई 2026,शुक्रवार को मनाई जाएगी।
- 01 मई 2026 को पीपल पूर्णिमा (वैशाख पूर्णिमा) पर विशेष संयोग बन रहे हैं इस दिन बुद्ध पूर्णिमा और शुक्रवार का दिन है और सिद्ध नामक योग भी रहेगा। अतः यह माता लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष संयोग है।
- वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को वैशाख पूर्णिमा कहते हैं। वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा और पीपल पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख पूर्णिमा भगवान बुद्ध से जुड़ी तीन अहम बातों के लिए जानी जाती है। इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म, बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति और बुद्ध के निर्वाण के कारक यह पूर्णिमा विशेष खास मानी जाती है। इस दिन पीपल की पूजा करने का विशेष महत्व है क्योंकि इस दिन पीपल की पूजा करने से लक्ष्मीजी की कृपा रहती है और ज्ञान में वृद्धि होती है। आइए जानते हैं बुद्ध पूर्णिमा पर मंत्रों और विधि से कैसे करें पीपल की पूजा…
- पीपल पूर्णिमा के दिन एक लोटे में जल भरकर थोड़ा सा दूध और जल मिलाएं। पीपल पर जल चढ़ाते समय अपने मुख को पूर्व या उत्तर दिशा में रखें, फिर वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएं। पूर्णिमा और शनिवार के दिन जल चढ़ाना विशेष लाभकारी माना जाता है। जब भी आप पीपल पर जल अर्पित करें तब इन मंत्रों का जप कर सकते हैं-:
‘आयु: प्रजां धनं धान्यं सौभाग्यं सर्वसम्पदम्।
देहि देव महावृक्ष त्वामहं शरणं गत:।।”
- अर्थात हे पीपल देवता, आयु, संन्तति, समृद्धि, धन धान्य आदि सब कुछ आप मुझे दीजिए, मैं आपकी शरण में आया हूं।
पीपल वृक्ष की महिमा
“मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे।
अग्रत: शिवरूपाय वृक्षराजाय ते नम:।।”
“आयु: प्रजां धनं धान्यं सौभाग्यं सर्वसम्पदम्।
देहि देव महावृक्ष त्वामहं शरणं गत:।।
- अर्थात-: पीपल की अग्रभाग में भगवान शिव, मध्य भाग में भगवान विष्णु और मूल भाग अर्थात पीपल की जड़ में ब्रह्माजी निवास करते हैं। यही नहीं, इसके अन्य भागों में वसु, रुद्र, वेद, ज्ञान, समुद्र, कामधेनु के साथ ही कई अन्य देव देवताओं का निवास माना जाता है।
- शास्त्र मान्यताओं के अनुसार पीपल का वृक्ष लगाने और जल चढ़ाने मात्र से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
- पीपल पूर्णिमा के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे अगर सायंकाल के समय सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं, तो उससे मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। हर रोज अगर कोई पीपल की परिक्रमा करे तो शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। पीपल की परिक्रमा विषम संख्या में करना शुभ रहता है, जैसे – 1, 3, 5, 7, 9, 11 या 108 करना सही रहता है।


