प्रकृति, पर्यावरण, जड़-चेतन और सकल दृश्य-अदृश्य जैव सत्ता परमात्मा का साकार स्वरुप है। अतः हमारे अंदर प्रकृति के प्रति आदर की भावना रहनी चाहिए।
जहाँ न पेड़-पौधे हैं, न चिड़िया का चहकना है, न हरियाली है, वहाँ जीवन केवल एक बोझ है। वह व्यक्ति जो कृत्रिम जीवन जीने का आदि हो चुका है और प्रकृति से दूर हो चुका है। वह व्यक्ति कभी मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ्य नहीं रह सकता है। पेड़-पौधे हमें मुफ्त में ऑक्सिजन देते हैं, इसलिए ढेर सारे पेड़ पौधे लगाइए, क्योंकि जब एक गैस का सिलेंडर खरीदने में इतने पैसे लगते हैं, तो सोचो अगर ऑक्सिजन का सिलेंडर साँस लेने के लिए खरीदना पड़ेगा तो क्या होगा.?
यदि हम संवेदनशील नागरिक हैं तो हमें आने वाली पीढ़ियों की चिंता जरूर करनी चाहिए। हम सभी भली-भांति परिचित हैं कि प्रकृति ही हमारी सभी आवश्यकताओं को पूर्ण करती है और जीवन के हर चरण में हमारा पोषण करती है। इसलिए प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना हम सबका दायित्व है..! अतः हम अपने कर्तव्य का निर्वहन करें और अपने हिस्से का एक पौधा अवश्य लगाएं…।
धन्यवाद!!

