
आरती श्री गणेश जी की वैसे तो गणेश जी की हार रूप की अलग स्तुति है लेकिन प्रचलित रूप में भगवान गणेश जी की 2 आरतियाँ प्रचलित है तो आइये स्मरण करें :-
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आरती श्री गणेश जी की (गणपति की सेवा मंगल मेवा)
Aarti Ganesh ji ki lyrics
गणपति की सेवा मंगल मेवा, सेवा से सब विघ्न टरें ।
तीन लोक तैंतीस देवता, द्वार खड़े अर्ज करें ||
ऋद्धि सिद्धि दक्षिण बाम विराजे, अरु आनन्द से चंमर करें ।
धूप दीप और लिए आरती, भक्त खड़े जयकार करें ||
गुड़ के मोदक भोग लगत हैं, मूषक वाहन चढ़या करें ।
सौम्यरूप सेवा गणपति की, विघ्न भाग जा दूर परें ।।
भादों मास शुक्ल चतुर्थी, दिन दोपहरा पूरं परें ।
लियो जन्म गणपति प्रभु जी ने, दुर्गा मन आनन्द करें ।।
श्री शंकर को आनन्द उपज्यो, नाम सुने सब विघ्न टरें ।
आन विधाता बैठे आसन, इन्द्र अप्सरा नृत्य करें ।।
देखत वेद ब्रह्माजी जाको, विघ्न विनाशन नाम धरें ।
एक दन्त गजबदन विनायक, त्रिनयन रूप अनूप धरें ।।
पग थम्बा सा उदर पुष्ट है, देख चन्द्रमा हास्य करें ।
दे शाप श्री चन्द्रदेव को, कलाहीन तत्काल करें ।।
चौदह लोक में फिरें गणपति, तीन भुवन में राज करें।
उठ प्रभात जो आरती गावें, जाके सिर यश छत्र फिरें ।।
गणपति की पूजा पहले करनी, काम सभी निर्विघ्न सरें ।
श्री गणपति जी की, कर जोड़कर स्तुति करें ।।
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गणपति की सेवा मंगल मेवा विडियो – आरती श्री गणेश जी की
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