श्री बगलामुखी माता दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें शत्रुओं पर विजय और वाणी की शक्ति प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। बगलामुखी पूजन या मंत्र जाप के बाद की जाने वाली आरती तो आइये स्मरण करें :-
आरती श्री बगलामुखीजी की | Baglamukhi Mata ki aarti
जय जय श्री बगलामुखी माता,
आरति करहुँ तुम्हारी ।। टेक ।।
पीत वसन तन पर तव सोहै,
कुण्डल की छबि न्यारी ।। जय-जय…..
कर-कमलों में मुद्गर धारै,
अस्तुति करहिं सकल नर-नारी ।। जय-जय……
चम्पक माल दले लहरावे,
एक सुर नर मुनि जय जयति उचारी ।। जय-जय…..
त्रिविधि ताप मिटि जात सकल सब,
भक्ति सदा तव है सुखकारी ।। जय-जय…..
पालत हरत सृजत तुम जग को,
सब जीवन की हो रखवारी ।। जय-जय…..
मोह निशा में भ्रमत सकल जन,
करहु हृदय महँ, तुम उजियारी ।। जय-जय…..
तिमिर नशावहु ज्ञान बढ़ाबहु,
अम्बे तुमही हो असुरारी ।। जय-जय…..
सन्तन को सुख देत सदा ही,
सब जन की तुम प्राण पियारी ।। जय-जय…..
तव चरणन जो ध्यान लगावै,
ताको हो सब भव-भयहारी ।। जय-जय…..
प्रेम सहित जो करहिं आरती,
ते नर मोक्षधाम अधिकारी ।। जय-जय…..



