श्री दुर्गा पूजन विधि (Durga Puja Vidhi with Mantra)

श्री दुर्गा पूजन विधि (Durga Puja Vidhi with Mantra)

श्री दुर्गा पूजन विधि | Durga Puja Vidhi

(पूजा हिन्दी दोहों में दी गई है)

अब हाथ में अक्षत लेकर दशों दिशाओं की ओर फेंकते हुए माँ दुर्गा का आवाहन करें –

आवाहन :

आदि शक्ति मातेश्वरी, जय अम्बे जगदम्ब ।
यहाँ पधारो मूर्ति में, कृपा करो अविलम्ब ॥

अब माँ दुर्गा को तीन बार जल से आचमन निम्न दोहा बोलकर करायें-

पाद्य अर्घ्य वा आचमन का जल यह तैयार ।
उसको भी मां प्रेम से, कर लो तुम स्वीकार ॥

उबटन :

सिके हुए जौ पीसकर, उसमें हल्दी डार ।
इत्र मिलाकर पीठी करूँ, श्रद्धा मन में धार ॥

स्नान :

दूध दही घी मधु तथा शक्कर से करो मां स्नान ।
निर्मल जल से फिर करो मां दुर्गा पुनः स्नान ॥

वस्त्र :

साड़ी चोली रूप में, वस्त्र द्वय ये अम्ब ।
भेंट करूँ सो लिजिए, मुझको तब अवलम्ब ॥

तिलक :

कुंकुम केशर का तिलक और माँग सिन्दूर ।
लेकर सब सुख दीजियो, करदो माँ दुःख दूर ॥

अंजन चूड़ी :

नयन सुभग कज्जल सुभग लो नेत्रों में डार ।
करो चूड़ियों से जननी ! हाथों का श्रृंगार ॥

पुष्प, धूप, दीपक :

गंधाक्षत के बाद में, यह फूलों का हार ।
धूप सुगंधित है तथा घी का दीपक माँ तैयार ॥

भोग :

भोग लगायें भक्ति से, जीमो रुचि से धाप ।
करो चुलू, ऋतुफल सुभग, आरोगो अब आप ॥

ताम्बूल :

एला पूग लवंगयुत, माँ खालो ताम्बूल ।
क्षमा करो मुझसे हुई, जो पूजा में भूल ॥

दक्षिणा :

क्या दे सकता दक्षिणा आती मुझको लाज ।
नमस्कार की भेंट लो जोडूं मैं दोनों हाथ ॥

आरती :

है कपूर सुन्दर सुरभिः जोकर घी की बाति ।
करूँ आरती आपकी, जो सब भांति सुहाति ॥

पुष्पाञ्जलि प्रदक्षिणा :

पुष्पाञ्जलि देता हुआ, परिक्रमा कर एक ।
हाथ जोड़ विनती करूँ, रखना मेरी लाज ॥

प्रार्थना स्त्रियों के लिए :

सदा सुहागिन मैं रहूँ, ऐसा वर दो माँ अपार ।
तब पूजा करती रहूँ, श्रद्धा मन में धार ।

प्रार्थना पुरुषों के लिए :

दुर्गा दुर्गति दूर कर सुखद वृत्ति सम्मान ।
पत्नी सुत-सुख दे मुझे, भिक्षुक अपना जान ॥

नोट-दुर्गा सहस्त्रनाम पाठ से पूर्व एक बार दुर्गाष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र व देव्या अर्गला स्तोत्र का एक बार पाठ कर लें । इससे सहस्त्रनाम पाठ का श्रेष्ठ फल प्राप्त होगा ।


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