भारत के प्रसिद्ध शनि मंदिर – भगवान शनि देव एक हिंदू देवता हैं, जो सूर्य देव और उनकी पत्नी छाया, छाया देवी के पुत्र हैं। वह हिंदू ज्योतिष में नौ ग्रहों में से एक है और शनि ग्रह से जुड़ा हुआ है।
शनि देव को अक्सर चार भुजाओं और लंबी, लहराती दाढ़ी वाले एक गहरे रंग के देवता के रूप में चित्रित किया जाता है। उन्हें अक्सर त्रिशूल और खोपड़ी पकड़े हुए दिखाया जाता है। उसके साथ अक्सर एक कौआ भी रहता है। उन्हें न्याय और कर्म के देवता के रूप में पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि वह अंडरवर्ल्ड का न्यायाधीश है और बुरे कर्म करने वालों को दंडित करने के लिए जिम्मेदार है। उन्हें सौभाग्य और समृद्धि का दाता भी माना जाता है।
शनि देव एक जटिल और बहुआयामी देवता हैं। हिंदू उनसे डरते भी हैं और पूजनीय भी। उन्हें रक्षक और दंडक के रूप में पूजा जाता है। वह एक अनुस्मारक है कि हमारे कार्यों के परिणाम होते हैं और हमें हमेशा अच्छा करने का प्रयास करना चाहिए।
भारत के प्रसिद्ध शनि मंदिर (Famous Shani Temples in India)
यहां भारत के कुछ सबसे प्रसिद्ध शनि मंदिरों का सारांश दिया गया है:
कोकिलावन शनि मंदिर, उत्तर प्रदेश

प्रसिद्ध कोकिलावन शनिदेव मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश में मथुरा के निकट कोसी कलां में स्थित है, जिसे कोकिलावन धाम कहा जाता है। यह शनिदेव और उनके गुरु बरखंडी बाबा का बहुत प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर घने जंगलों के बीच स्थित है। इसी कारण इसका नाम कोकिलावन है। पूरे भारत से लोग यहां पूजा करने आते हैं।
कोकिलावन शनि मंदिर, जिसे कोकिलावन धाम के नाम से भी जाना जाता है, भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में मथुरा जिले के कोसी कलां नामक स्थान के पास स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर परिसर है।
- समय: मंदिर 24 घंटे खुला रहता है। प्रत्येक शनिवार को यहाँ लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। शुक्रवार की आधी रात (12:00 बजे) के बाद विशेष पूजा शुरू होती है।
- प्रवेश शुल्क: मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है।
- परिक्रमा: मंदिर की 1.25 किलोमीटर (सवा कोसी) परिक्रमा का बहुत महत्व है, जिसे करने के बाद भक्त सूर्यकुंड में स्नान कर शनिदेव को तेल चढ़ाते हैं।
- मुख्य देवता: यह मंदिर शनि देव और उनके गुरु बरखंडी बाबा को समर्पित है।
पौराणिक महत्व
ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने शनिदेव की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें इसी वन में कोयल के रूप में दर्शन दिए थे। तभी से इस स्थान का नाम कोकिलावन पड़ा और यहाँ शनिदेव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है, खासकर शनि की साढ़े साती और ढैय्या के दौरान।
शनिचरा मंदिर, मुरैना मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के ऐंती ग्राम के निकट शनि पर्वत पर स्थित शनिचरा मंदिर शनिदेव महाराज की तपोभूमि है। शनि पर्वत का उल्लेख त्रेता युग से ही मिलता है। मध्य प्रदेश में शनिचरा मंदिर मुरैना जिले के ऐंती गाँव में स्थित है और यह देश के सबसे प्राचीन शनि मंदिरों में से एक माना जाता है।
इस मंदिर का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है और भक्तों में इसकी बहुत मान्यता है।
- समय: मंदिर 24 घंटे खुला रहता है। शनिवार और शनिश्चरी अमावस्या पर विशेष भीड़ होती है।
- विशेषताएँ:
- पौराणिक कथा: स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, रावण द्वारा कैद किए गए शनिदेव को हनुमान जी ने लंका से मुक्त कर इसी पर्वत पर फेंका था। तभी से यह स्थान शनि क्षेत्र के नाम से विख्यात हो गया।
- सिंदूर लेपन: यहाँ भक्त शनिदेव की प्रतिमा पर तेल चढ़ाने के बाद सिंदूर लगाते हैं और फिर इस सिंदूर से अपने माथे पर तिलक करते हैं।
- प्राकृतिक वातावरण: मंदिर निर्जन वन में शनि पर्वत पर स्थित है, जो भक्तों को शांतिपूर्ण और दिव्य अनुभव प्रदान करता है।
- अन्य मंदिर: मंदिर परिसर के पास ही ‘पौड़ी वाले हनुमान जी’ की प्रतिमा और राधा-कृष्ण मंदिर भी स्थित हैं।
शनि शिंगणापुर, महाराष्ट्र

स्थान: नेवासा तालुका, अहमदनगर जिला
अनूठी विशेषता: मंदिर अपनी छत और दीवारों की कमी के लिए उल्लेखनीय है। देवता को सोनाई नामक एक मंच पर रखे गए काले पत्थर के स्लैब के रूप में दर्शाया गया है। किंवदंती में कहा गया है कि स्लैब एक नदी में तैरता हुआ पाया गया था और इसे शनि देव के दिव्य प्रतिनिधित्व के रूप में पहचाना गया था।
श्री शनि शिंगणापुर मंदिर महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित एक विश्व प्रसिद्ध मंदिर है, जो अपनी अनूठी परंपराओं और चमत्कारी मान्यताओं के लिए जाना जाता है।
- समय: यह मंदिर भक्तों के लिए 24 घंटे खुला रहता है। हालांकि, दर्शन का मुख्य समय सुबह 5:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक है, और आरती सुबह 5:00 बजे, दोपहर 12:00 बजे, शाम 6:00 बजे और रात 10:00 बजे होती है।
- प्रवेश शुल्क: मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है, लेकिन VIP दर्शन के लिए प्रति व्यक्ति ₹500 का शुल्क लगता है।
- स्वयंभू मूर्ति: यहाँ शनि देव की लगभग 5.5 फुट ऊंची काले पत्थर की एक स्वयंभू (स्वयं प्रकट हुई) मूर्ति है।
- खुले आसमान के नीचे: मूर्ति एक ऊंचे चबूतरे पर खुले आसमान के नीचे स्थापित है, क्योंकि पौराणिक कथाओं के अनुसार शनि देव ने सपने में बताया था कि उन्हें किसी छत की आवश्यकता नहीं है।
- बिना दरवाज़े का गाँव: गाँव के लोगों का शनि देव में अटूट विश्वास है, जिसके चलते गाँव के किसी भी घर, दुकान या यहाँ तक कि स्थानीय बैंक में भी दरवाजे या ताले नहीं लगे हैं। उनका मानना है कि शनि देव स्वयं गाँव की रक्षा करते हैं और यहाँ चोरी नहीं हो सकती।
- दर्शन विधि: पुरुष भक्त पारंपरिक रूप से स्नान करके और गीले कपड़े पहनकर सीधे मूर्ति पर तेल चढ़ाते हैं और पूजा कर सकते हैं।
शनि धाम मंदिर, नई दिल्ली

स्थान: नई दिल्ली
अनूठी विशेषता: यहां शनि देव की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है, जो 21 फीट ऊंची है। भक्तों का मानना है कि यहां सच्ची प्रार्थना से बाधाओं और बीमारियों को दूर करने में मदद मिल सकती है।
नई दिल्ली में मुख्य शनि धाम मंदिर दक्षिण दिल्ली के असोला गाँव में स्थित श्री सिद्ध शक्तिपीठ शनिधाम है, जो अपनी विशाल शनि प्रतिमा के लिए जाना जाता है।
यह मंदिर भारत के सबसे बड़े शनि मंदिरों में से एक माना जाता है और शनि भक्तों के लिए एक प्रमुख धार्मिक स्थल है।
- विशेषताएँ:
- यहाँ शनि देव की एक प्राकृतिक चट्टान की मूर्ति के साथ-साथ अष्टधातुओं से बनी एक बड़ी मूर्ति भी स्थापित है।
- मंदिर परिसर में भगवान हनुमान, देवी जगदंबा और शिव लिंग सहित अन्य देवताओं के मंदिर भी हैं।
- शनि अमावस्या, दीपावली और नवरात्रि जैसे त्योहारों पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है।
शनिश्वर भगवान मंदिर, तमिलनाडु

स्थान: तिरुनल्लार
अनूठी विशेषता: प्रमुख नवग्रह मंदिरों का हिस्सा। भक्तों का मानना है कि यहां पूजा करने से शनि दोष और दुर्भाग्य के प्रभाव कम हो जाते हैं। मंदिर में नालन थीर्टम नामक एक पवित्र तालाब भी है, जहां माना जाता है कि स्नान करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
तमिलनाडु में कई महत्वपूर्ण शनि देवालय हैं, लेकिन इनमें सबसे प्रसिद्ध मंदिर तिरुनालार (Thirunallar), पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश में स्थित है, जो तमिलनाडु की सीमा के बहुत करीब है और अक्सर तमिलनाडु के शनि मंदिरों की सूची में शामिल किया जाता है। इसके अलावा, कुचनूर (Kuchanur) में भी एक प्रमुख मंदिर है।
यह नवग्रह स्थलों में सबसे महत्वपूर्ण है और विशेष रूप से शनि ग्रह को समर्पित है। मान्यता है कि यहाँ शनि देव की पूजा करने से “शनि दोष” या साढ़े साती के बुरे प्रभाव कम हो जाते हैं।
- स्थान: ओएनजीसी कॉलोनी, तिरुनालार, कराईकल जिला, पुडुचेरी 609607।
- समय: मंदिर शनिवार को सुबह 5:30 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है। अन्य दिनों में, यह आमतौर पर सुबह 6:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और शाम 4:00 बजे से 8:30 बजे तक खुला रहता है।
- विशेषता: भक्त मंदिर के पास स्थित ‘नाला थीर्थम’ नामक पवित्र तालाब में स्नान करते हैं, जिसके बारे में माना जाता है कि इससे सभी दुर्भाग्य दूर हो जाते हैं।
बन्नंजे श्री शनि क्षेत्र, कर्नाटक

स्थान: उडुपी के पास
अनूठी विशेषता: इसमें भगवान शनि की एक ऊंची अखंड प्रतिमा है। तैलाभिषेक (तेल से स्नान करना) यहां का एक महत्वपूर्ण प्रसाद है। भक्त चुनौतियों और बाधाओं को दूर करने के लिए आशीर्वाद के लिए आते हैं।
बन्नंजे श्री शनि क्षेत्रकर्नाटक के उडुपी शहर में स्थित एक बहुत प्रसिद्ध और अनोखा मंदिर है, जो विश्व की सबसे बड़ी अखंड (monolithic) शनि देव की प्रतिमा के लिए जाना जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
- विशाल प्रतिमा: मंदिर में भगवान शनिदेव की 23 फीट ऊंची अखंड मूर्ति स्थापित है, जो एक दो-स्तरीय चबूतरे पर रखी गई है ताकि सभी भक्तों को आसानी से दिखाई दे सके।
- तैलाभिषेकम् (तेल चढ़ाना): भक्त सीढ़ियों से ऊपर चढ़कर सीधे मूर्ति के ऊपर तेल चढ़ा सकते हैं, जिसे यहाँ एक प्रमुख पूजा विधि माना जाता है।
- शांतिपूर्ण वातावरण: महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर के विपरीत, यह स्थान आमतौर पर कम भीड़भाड़ वाला होता है, जिससे भक्त शांति से पूजा कर सकते हैं.
- स्थान: यह मंदिर उडुपी श्री कृष्ण मठ से लगभग 2 किलोमीटर और उडुपी सिटी बस स्टैंड से सिर्फ 1 किलोमीटर दूर है.
- दर्शन का समय:
- शनिवार: सुबह 6:00 बजे से रात 8:30 बजे तक।
- अन्य दिन: आमतौर पर सुबह 7:00 बजे से 11:30 बजे तक और दोपहर 3:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक खुला रहता है.
येरदानूर शनि मंदिर, तेलंगाना

स्थान: मेडक जिला
अनूठी विशेषता: यहां काले पत्थर से बनी शनि देव की 20 फुट ऊंची विशाल मूर्ति है। यह मंदिर सरसों या तिल के तेल के दीपक से जुड़े अनुष्ठानों के लिए जाना जाता है।
तेलंगाना में येरदानूर शनि मंदिर मेडक जिले के येरदानूर गाँव में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। इस मंदिर में भगवान शनिदेव की एक बड़ी मूर्ति स्थापित है।
- स्थान: यह मंदिर तेलंगाना के मेडक जिले के येरदानूर (Yerdanur) गाँव में स्थित है।
- मूर्ति: मंदिर परिसर में भगवान शनि की लगभग 20 फुट ऊंची एक विशाल मूर्ति है, जो काले पत्थर से बनी है। इसे तेलंगाना में शनिदेव की सबसे बड़ी मूर्तियों में से एक माना जाता है।
- महत्व: यह शनि दोष निवारण के लिए एक महत्वपूर्ण और पूजनीय स्थान है। भक्त यहाँ बड़ी संख्या में, विशेषकर शनिवार को पूजा-अर्चना करने आते हैं।
- वातावरण: मंदिर का वातावरण शांत और दिव्य है, जो भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
आप इस मंदिर के बारे में अधिक जानकारी के लिए shanitemple.org (सामान्य शनि मंदिर वेबसाइट) या स्थानीय स्रोतों से संपर्क कर सकते हैं।
शनि देवालय, महाराष्ट्र

स्थान: देवनार, मुंबई
अनूठी विशेषता: काले जादू और बेदखली से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए जाना जाता है। इसे अक्सर साणेश्वर मंदिर के रूप में जाना जाता है।
महाराष्ट्र में सबसे प्रसिद्ध शनि देवालय श्री शनि शिंगणापुर मंदिर (Shani Shingnapur Temple) है, जो अहमदनगर जिले में स्थित है। यह मंदिर भारत के सबसे अनूठे और पूजनीय शनि मंदिरों में से एक माना जाता है।
यह मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं और चमत्कारी मान्यताओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
- स्थान: शनि शिंगणापुर, नेवासा तालुका, अहमदनगर जिला, महाराष्ट्र 414105।
- समय: मंदिर 24 घंटे खुला रहता है, हालांकि दर्शन का मुख्य समय सुबह 5:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक है। आरती सुबह 5:00 बजे, दोपहर 12:00 बजे, शाम 6:00 बजे और रात 10:00 बजे होती है।
- विशेषताएँ:
- स्वयंभू मूर्ति: यहाँ शनि देव की 5.5 फुट ऊंची काले पत्थर की एक स्वयंभू (स्वयं प्रकट हुई) मूर्ति है, जो बिना किसी छत या दीवार के एक खुले चबूतरे पर स्थापित है।
- बिना दरवाज़े का गाँव: गाँव के निवासियों का शनि देव में इतना गहरा विश्वास है कि गाँव के किसी भी घर या दुकान में दरवाजे या ताले नहीं लगे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि शनि देव स्वयं उनकी संपत्ति की रक्षा करते हैं।
- दर्शन: भक्त स्वयं मूर्ति का अभिषेक और पूजा कर सकते हैं।
शनिश्वर क्षेत्रम, केरल

स्थान: कोट्टायम जिला
अनूठी विशेषता: अन्य शनि मंदिरों के विपरीत, यहां की मूर्ति को एक परोपकारी देवता के रूप में चित्रित किया गया है, जो अपनी समस्याओं को लेकर आने वालों को सहायता प्रदान करते हैं।
केरल में शनिश्वर क्षेत्रम (शनि मंदिर) के नाम से कई महत्वपूर्ण मंदिर हैं, जिनमें सबसे प्रमुख कुरुपुमथरा (कोट्यम) और एरामथूर (अलाप्पुझा) में स्थित हैं।
यह केरल के सबसे प्रसिद्ध शनि मंदिरों में से एक है। यहाँ शनि देव को एक “आशीर्वाद देने वाले देवता” (अभयहस्तम) के रूप में पूजा जाता है, जो अन्य शनि मंदिरों की तुलना में विशिष्ट है।
- दर्शन का समय: यह मंदिर मुख्य रूप से बुधवार और शनिवार को सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक दर्शन के लिए खुलता है।
- मुख्य पूजा: यहाँ ‘सहस्र नीराजनम’ (1008 नारियल के साथ पूजा) और ‘अष्टद्रव्य अभिषेकम’ मुख्य अनुष्ठान हैं।
शनि महात्मा मंदिर, कर्नाटक

स्थान: चिक्का मधुरे
अनूठी विशेषता: एक स्थानीय किसान द्वारा निर्मित। मंदिर में विशेष रूप से शनिवार और हिंदू श्रावण माह के दौरान भीड़ होती है। भक्त तिल के तेल में डूबे एक छोटे काले कपड़े में काले तिल चढ़ाते हैं।
कर्नाटक में श्री शनि महात्मा मंदिर के नाम से कई मंदिर हैं, जिनमें से चिक्का माधुरे (बेंगलुरु के पास) और पावागड़ा (तुमकुर जिले में) सबसे प्रसिद्ध हैं।
यह मंदिर बेंगलुरु ग्रामीण जिले के डोड्डाबल्लापुर तालुक में, कनासवडी गांव के पास स्थित है। इसे सबसे पुराने शनि मंदिरों में से एक माना जाता है।
- समय: यह आमतौर पर सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहता है।
- विशेषता: मंदिर में शनीश्वर की एक स्वयंभू मूर्ति है। भक्त शनिवार को यहाँ बड़ी संख्या में आते हैं और शनि देव को प्रसन्न करने के लिए काले तिल को कपड़े में बांधकर और तिल के तेल में भिगोकर चढ़ाते हैं।
शनि मंदिर, मध्य प्रदेश

स्थान: इंदौर
अनूठी विशेषता: यहां की मूर्ति को रंगीन पोशाक और मुकुट से सजाया जाता है, और दूध और पानी से अभिषेक किया जाता है। इस मंदिर की प्रथाएं अन्य शनि मंदिरों से अलग हैं, जिनमें आमतौर पर तिल के तेल का उपयोग किया जाता है।
यह इंदौर के सबसे पुराने और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। मान्यता है कि यह स्वयंभू मूर्ति है (स्वयं प्रकट हुई) और लगभग 300-350 साल पुरानी है। यह भारत का एकमात्र शनि मंदिर है जहाँ शनिदेव की मूर्ति का सोलह श्रृंगार किया जाता है।
- समय: यह मंदिर आमतौर पर शनिवार को सुबह 7 बजे से रात 11 बजे तक खुला रहता है। कुछ स्रोतों के अनुसार, मंदिर सुबह 5 बजे से रात 12 बजे तक दर्शन के लिए खुला रहता है।
- विशेषता: शनिवार शाम की आरती बहुत लोकप्रिय है और इस दौरान काफी भीड़ होती है।
शनि देव संबंधी चुनौतियों से राहत पाने के लिए भक्त मुख्य रूप से शनिवार को शनि मंदिरों में जाते हैं। सामान्य अनुष्ठानों में कौओं को खाना खिलाना और पीपल के पेड़ों की पूजा करना शामिल है, क्योंकि इन्हें शनि देव से संबंधित माना जाता है। भक्त अक्सर देवता से सीधे नज़रें मिलाने से बचते हैं, उनका मानना है कि शनि की दृष्टि कठिनाई ला सकती है।
ये मंदिर न केवल आध्यात्मिक केंद्र के रूप में काम करते हैं, बल्कि भगवान शनि के आसपास की गहरी सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत का भी प्रतीक हैं।
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