
हरि हम कब होंगे ब्रजवासी भजन लिरिक्स
Hari Hum Kab Honge Brijwasi Bhajan Lyrics
Shri Indresh Upadhyay Ji Bhajan Lyrics
हरि हम कब होंगे ब्रजवासी,
हरि हम कब होंगे ब्रजवासी,
ठाकुर नन्द किशोर हमारे,
ठाकुर नन्द किशोर हमारे,
ठकुरानी राधा सी,
हरि हम कब होंगे ब्रजवासी,
हरि हम कब होंगे ब्रजवासी ।।
कब मिली है वे सख्खी सहेली,
हरि वंशी हरि दासी,
वंशीवट की शीतल छैयाँ,
सुभग नदी यमुना सी,
हरि हम कब होंगे ब्रजवासी,
हरि हम कब होंगे ब्रजवासी ।।
जाकी वैभव करत लालसा,
कर मीत कमला सी,
इतनी आस व्यास की पूजवो,
श्री वृन्दा-विपिन विलासी,
हरि हम कब होंगे ब्रजवासी,
हरि हम कब होंगे ब्रजवासी ।।
हरि हम कब होंगे ब्रजवासी,
हरि हम कब होंगे ब्रजवासी,
ठाकुर नन्द किशोर हमारे,
ठाकुर नन्द किशोर हमारे,
ठकुरानी राधा सी,
हरि हम कब होंगे ब्रजवासी,
हरि हम कब होंगे ब्रजवासी ।।
संगीत गायक – इन्द्रेश उपाध्याय जी (भक्तिपथ) (Swar Indresh ji Maharaj)
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इन्द्रेश जी महाराज जो की प्रसिद्द कथावाचक कृष्णा चन्द्र शाश्त्री जी के पुत्र भी है, इन्द्रेश उपाध्याय जी एक प्रसिद्ध युवा कथावाचक हैं, जिन्होंने भागवत कथा, राम कथा, और सनातन धर्म को जनमानस तक पहुँचाने का कार्य पूरे समर्पण से किया है। पढ़ें इन्द्रेश उपाध्याय महाराज जीवन परिचय, कथा सेवा व भक्ति पथ के बारे में और इन्द्रेश जी महाराज भजन लिरिक्स




