मई के आखिरी और जून की शुरुआत वाले दिनों में सूर्य की किरणें तेज व सीधी पड़ती हैं, जिससे जमीन तेजी से गर्म होती है। यही वजह है कि नौतपा के दौरान गर्मी चरम पर पहुंच जाती है। हालांकि हर साल मौसम एक जैसा नहीं रहता। कभी-कभी बारिश या पश्चिमी विक्षोभ के कारण तापमान थोड़ा कम भी हो सकता है, लेकिन फिर भी इन दिनों को गर्मी का सबसे कठिन दौर माना जाता है।
नौतपा-:
- नौतपा का संबंध ज्योतिष और मौसम दोनों से माना जाता है। जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब से अगले 9 दिनों की अवधि को नौतपा कहा जाता है। मान्यता है कि इस समय सूर्य की गर्मी सबसे ज्यादा असर दिखाती है।
- इस बार नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहने वाला है। इन दिनों में उत्तर भारत सहित कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर पहुंच सकता है।और गर्म हवाओं का दौर भी बढ़ जाता है।
नौतपा के दौरान सावधानी-:
- नौतपा के दौरान सबसे बड़ा खतरा लू और हीटस्ट्रोक का होता है। लगातार तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण शरीर का तापमान बढ़ने लगता है।अगर समय पर पानी न मिले या धूप में ज्यादा देर रहें, तो व्यक्ति डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकता है। अतः इस समय के दौरान विशेष सावधानी बरतें।
- इन दिनों बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है। कई बार सिरदर्द, चक्कर, कमजोरी, उल्टी और बेहोशी जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं। अतः इस समय के दौरान सावधानी बरतनी चाहिए
- सबसे महत्वपूर्ण इस समय के दौरान शरीर में पानी की कमी न होने दे। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और घर से बाहर निकलते समय पानी की बोतल साथ जरूर रखें।
- दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें। अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो सिर को कपड़े या टोपी से ढकें. हल्के रंग और सूती कपड़े पहनना बेहतर रहता है।
- घर में ओआरएस, ग्लूकोज, नींबू पानी, छाछ और नारियल पानी जैसी चीजें रखें। ये शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को धूप में बिल्कुल न भेजें।
- तेज गर्मी की वजह से पशु पक्षियों को भी बड़ा नुकसान होता है अतः उनके लिए दाना- पानी की व्यवस्था जरूर करें।
- इस समय तेज गर्मी के दौरान पेड़ पौधे भी सूखने लगते हैं, अतः पेड़ पौधों को पर्याप्त मात्रा में पानी दें।पानी देने का समय शाम 6:00 बजे के बाद होना चाहिए।


