पेड़ लगाना पुण्य का कार्य | प्रेरक कहानियाँ

हमारी सनातन संस्कृति में वृक्षों को प्रेम, सहानुभूति और आदर प्राप्त है। हम पेड-पौधों को चेतन मानते हैं, उनके सुख-दु:ख में विश्वास करते हैं। यहाँ वृक्ष को काटना पाप माना गया है।

पेड़ लगाना पुण्य का कार्य

अब तो देश-विदेश के वैज्ञानिकों ने वैज्ञानिक रूप से सिद्ध कर दिया कि मनुष्य की तरह सुख, दु:ख, मृत्यु, शोक तथा हर्ष इत्यादि का प्रभाव पेड़- पौधों पर भी पडता है। इस दृष्टि से देखें तो वृक्ष पूजन का विज्ञान सूक्ष्म अनुसंधान का सूचक है।

वैसे तो सभी वृक्ष लाभकारी हैं, परन्तु बड़, नीम, पीपल, तुलसी, आँवला आदि के वृक्ष रासायनिक दृष्टि से बड़े ही उपयोगी हैं। तुलसी का पौधा घर में लगाना, नित्य प्रात:काल उसका पूजन और जल देना हम भारतीयों की दिनचर्या के अनिवार्य हिस्से जैसा है।

वैज्ञानिक स्वीकार करते हैं कि तुलसी के संसर्ग से वायु शुद्ध रहती है। इससे विषैले कृमियों का नाश होता है। इसी प्रकार मन्दिरों में तुलसी, आंवला, विल्वपत्र, पीपल इत्यादि लगाने और पूजने का विधान है।

पवित्र कार्तिक माह में जिस तरह से स्नान- दान- पुण्य इत्यादि का विशेष महत्व है उसी तरह तुलसी वृक्ष की पूजा का भी विशेष महत्व है। इस माह में विधिवत स्नान व तुलसी की पूजा करने से, तुलसी के पास दीपक जलाने से आरोग्य प्रदान होता है।

अतः इस पवित्र माह में अधिक से अधिक तुलसी के पौधों का दान करने का शास्त्रीय विधान है, मंदिरों में व घरों में तुलसी के वृक्ष लगाए जाते हैं, क्योंकि तुलसी का पौधा अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ व पवित्र बनाए रखता है।


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