रामायण आवाहन दोहे | रामायण प्रारंभ के दोहे | Ramayan Avahan Dohe

रामायण आवाहन दोहे रामायण प्रारंभ के दोहे Ramayan Avahan Dohe

जब भी रामायण प्रारंभ की जाती है प्रायः कमिटी में धुन उठाते समय रामायण आवाहन किया जाता है उस समय कहे जाने वाले प्रसिद्द दोहे हमने आपके लिए लिखे है पढ़ें और आनंद लें

जेहि सुमिरत सिध्द होय गण नायक करिवर बदन ।
करहुँ अनुग्रह सोई बुध्दि राशि शुभ गुण सदन ॥

मूक होई वाचाल पंगु चढ़ई गिरिवर गहन ।
जासु कृपासु दयालु द्रवहॅुं सकल कलिमल दहन ॥

नील सरोरुह श्याम तरुन अरुन वारिज नयन ।
करहुँ सो मम उर धाम सदा क्षीर सागर सयन ॥

ह्लाुंँद – इंदु सम देह उमा रमन करुणा अयन ।
जाहिं दीन पर नेह करहुँ कृपा मर्दन मयन ॥

बंदहु गुरु पद कंज कृपा सिंधु नर रुप हरि ।
महा मोह तब पुंज जासु वचन रवि कर निकर ॥

बंदहु मुनि पद कंज रामायन जेहि निर मयऊ ।
सखर सुकोमल मंजु दोष रहित दुषन सहित ॥

बंदहु चारहुं वेद भव वारिध वो हित सरिस ।
जिनहिं न सपनेहु खेद वरनत रघुपति विमल यश ॥

वंदहु विधि पद रेनु भव सागर जिन कीन्ह यह ।
संत सुधा शशि धेनु प्रगटे खल विष वारुनी ॥

बंदहु अवध भुआल सत्य प्रेम जेहि राम पद ।
बिछुरत दीन दयाल प्रिय तनु तृन इव पर हरेऊ ॥

बंदहु पवन कुमार खल वन पावक ज्ञान घन ।
जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चापधर ॥

राम कथा के रसिक तुम,भक्ति राशि मति धीर ।
आय सो आसन लीजिये, तेज पुंज कपि वीर ॥

रामायण तुलसीकृत कहँऊ कथा अनुसार ।
प्रेम सहित आसन गहँऊ आवहँ पवन कुमार ॥

सियावर रामचंद्र की जय | पवनसुत हनुमान की जय | गोस्वामी तुलसीदास की जय | बोलो महादेव देव की जय | बोलो जय जय सीताराम


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