श्रीकृष्ण कवचम् (कृष्ण भगवान की कृपा हेतु) Shri Krishna Kavach

श्रीकृष्ण कवचम् (कृष्ण भगवान की कृपा हेतु) Shri Krishna Kavach

Shri Krishna Kavach – भगवान श्री कृष्ण ऐश्वर्य के स्वामी है, कहते है भगवान कृष्ण को प्रसन्न करना थोड़ा कठिन है लेकिन अच्छा आचरण और आपकी श्रद्धा अच्छी हो तो श्रीकृष्ण प्रसन्न हो जाते है, और आपकी रक्षा करते है। तो आइए स्मरण करें श्रीकृष्ण कवचम्

विनियोगः


ॐ अस्य श्रीकृष्णकवचमन्त्रस्य नारद ऋषिः अनुष्टुप् छन्दः श्रीकृष्णः देवता भक्तिरक्षार्थे जपे विनियोगः ॥

कर-न्यास (सरल वैष्णव पद्धति)

ॐ वसुदेवसुताय अङ्गुष्ठाभ्यां नमः
ॐ गोविन्दाय तर्जनीभ्यां नमः
ॐ माधवाय मध्यमाभ्यां नमः
ॐ केशवाय अनामिकाभ्यां नमः
ॐ नारायणाय कनिष्ठिकाभ्यां नमः
ॐ श्रीकृष्णाय करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः

अङ्ग-न्यास

ॐ वसुदेवसुताय हृदयाय नमः
ॐ नन्दनन्दनाय शिरसे स्वाहा
ॐ जगन्नाथाय शिखायै वषट्
ॐ गोपालाय कवचाय हुं
ॐ माधवाय नेत्रत्रयाय वौषट्
ॐ श्रीकृष्णाय अस्त्राय फट्

प्रणम्य देवं विप्रेशं प्रणम्य च सरस्वतीम्।
प्रणम्य च मुनीन् सर्वान् सर्वशास्त्रविशारदान्।।१।।

श्रीकृष्णकवचं वक्ष्ये श्रीकीर्तिविजयप्रदम्।
कान्तारे पथि दुर्गे च सदा रक्षाकरं नृणाम्।।२।।

स्मृत्वा नीलाम्बुदश्यामं नीलकुञ्चितकुन्तलम्।
बर्हिपिञ्छलसन्मौलिं शरच्चन्द्रनिभाननम्।।३।।

राजीवलोचनं राजद्वेणुना भूषिताधरम्।
दीर्घपीनमहाबाहुं श्रीवत्साङ्कितवक्षसम्।।४।।

भूभारहरणोद्युक्तं कृष्णं गीर्वाणवन्दितम्।
निष्कलं देवदेवेशं नारदादिभिरर्चितम्।।५।।

नारायणं जगन्नाथं मन्दस्मितविराजितम्।
जपेदेवमिमं भक्त्या मन्त्रं सर्वार्थसिद्धये।।६।।

सरर्वदोषहरं पुण्यं सकलव्याधिनाशनम्।
वसुदेवसुतः पातु मूर्धानं मम सरर्वदा।।७।।

ललाटं देवकीसूनुः भ्रूयुग्मं नन्दनन्दनः।
नयनौ पूतनाहन्ता नासां शकटमर्द्दनः।।८।।

यमलार्जुनहृत्कर्णौकि कपोलौ नगमर्द्दनः।
दन्तान् गोपालकः पोतु जिह्वां हय्यङ्गवीनभुक्।।९।।

ओष्ठं धेनुकजित्पायादधरं केशिनाशनः।
चिबुकं पातु गोविन्दो बलदेवानुजो मुखम्।।१०।।

अक्रूरसहितः कण्ठं कक्षौ दन्तिवरान्तकः।
भुजौ चाणूरहारिर्मे करौ कंसनिषूदनः।।११।।

वक्षो लक्ष्मीपतिः पातु हृदयं जगदीश्वरः।
उदरं मधुरानाथो नाभिं द्वारवतीपतिः।।१२।।

रुग्मिणीवल्लभः पृष्ठं जघनं शिशुपालहा।
ऊरू पाण्डवदूतो मे जानुनी पार्थसारथिः।।१३।।

विश्वरूपधरो जङ्घे प्रपदे भूमिभारहृत्।
चरणौ यादवः पातु पातु विघ्नोऽखिलं वपुः।।१४।।

दिवा पायाज्जगन्नाथो रात्रौ नारायणः स्वयम्।
सरर्वकालमुपासीरिस्सर्वकामार्थसिद्धये।।१५।।

इदं कृष्णबलोपेतं यः पठेत् कवचं नरः।
सर्वदाऽऽर्तिभयान्मुक्तः कृष्णभक्तिं समाप्नुयात्।।१६।।

।। इति श्रीकृष्ण कवचं सम्पूर्णम् ।


श्रीकृष्ण कवच-पाठ की विधि (सबसे महत्वपूर्ण)

कब पढ़ें
प्रातः स्नान के बाद या रात्रि में शयन से पूर्व एकाग्रता हो तो पर्याप्त।

श्रीकृष्ण कवच कितनी बार पढ़ना चाहिए

1 पाठ नित्य पर्याप्त
संकट काल में 3 या 11 पाठ अवश्य करें।

आसननिम्नलिखित होना चाहिए़।
कुश / ऊन / वस्त्र
पूर्व या उत्तर मुख

किसके लिए यह कृष्ण कवच विशेष फलदायी है?

भय, अनिष्ट, शत्रु-बाधा
यात्रा, वन, रात्रि, असुरक्षा
रोग, मानसिक अशांति
कृष्ण-भक्ति की दृढ़ता
बच्चों और गृहस्थों के लिए

बिना गुरु के क्या करें, क्या न करें


केवल पाठ + सरल न्यास
बीज-मंत्र जोड़ना नहीं
तांत्रिक प्रयोग नहीं
वशीकरण / प्रयोग भावना नहीं

यह रक्षा-कवच है, प्रयोग-मंत्र नहीं। तो प्रियजन इस बात का अवश्य ध्यान दें।


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