Mahavidya Kavach – श्रीमहाविद्या कवचम् देवी माता पार्वती स्वयं शक्ति का रूप हैं, देवी बगलामुखी यन्त्र और तंत्र विद्या की देवी की आराधना भक्त शक्ति की प्राप्ति लिए करते है तो आइये स्मरण करें दस महाविद्या स्तोत्र।
श्रीमहाविद्या कवचम् | Shri Mahavidya Kavach Stotra
श्रीमहाविद्या कवचम्
ॐ प्राच्यां रक्षतु मे ताराकामरुप निवासिनी।
आग्नेयां षोडशी पातु, याम्यां धूमावती स्वयम ।।१।।
नैर्ॠत्यां भैरवी पातु, वारुण्यां भुवनेश्वरी।
वायव्यां सततं पातु, छिन्नमस्ता महेश्वरी ।।२।।
कौबेर्यां पातु मे देवी, श्रीविधा बगला-मुखी ।
ऐशान्यां पातु मे नित्यं महात्रिपुर सुन्दरी ।।३।।
उर्ध्वं रक्षतु मे विधा, मातङ्गी पीठ वासिनी ।
सर्वत: पातु मे नित्यं, कामाख्या कालिका स्वयम ।।४।।
ब्रह्म-रुपा-महा-विधा, सर्वविधा-मयी स्वयम ।
शिर्षे रक्षतु मे दुर्गा, भालं श्रीभव-गेहिनी ।।५।।
त्रिपुरा भ्रुयुगे पातु, शर्वाणी पातु नासिकाम ।
चक्षुषी चण्डिका पातु, श्रीत्रे नीलसरस्वती ।।६।।
मुखं सौम्य-मुखी पातु, ग्रिवां रक्षतु पार्वती ।
जिह्वां रक्षतु मे देवी, जिह्वा-ललन भीषणा ।।७।।
वाग्-देवी वदनं पातु वक्ष: पातु महेश्वरी।
बाहु महा-भुजा पातु, करांगुली: सुरेश्वरी ।।८।।
पृष्ठत: पातु भिमास्या, कट्यां देवी दिगम्बरी।
उदरं पातु मे नित्यं, महाविधा महोदरी ।।९।।
उग्र-तारा महा-देवी, जंघोरु परी-रक्षतु ।
गूदं मुष्कं च मेढुं च, नाभीं च सुर-सुन्दरी ।।१०।।
पदांगुली: सदा पातु, भवानी त्रिदशेश्वरी।
रक्तं-मांसास्थी-मज्जादिन, पातु देवी शवासना ।।११।।
महाभयेषु घोरेषु, महाभय-निवारिणी।
पातु देवी महामाया,कामाख्या पीठवासिनी ।।१२।।
भस्माचल-गता दिव्य-सिंहासन-कृताश्रया ।
पातु श्रीकालिका-देवी, सर्वोत्पातेषु सर्वदा ।।१३।।
रक्षाहीनं तु यत स्थानं, कवचेनापि वर्जितम ।
तत्-सर्व सर्वदा पातु, सर्वरक्षण-कारिणी ।।१४।।
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