सूर्यस्तोत्रम् जब प्रभात की पहली किरण धरती को स्पर्श करती है, तब ऐसा लगता है मानो स्वयं सूर्यदेव अपने भक्तों को आशीर्वाद दे रहे हों। (Surya Stotram Lyrics) सूर्य स्तोत्र का पाठ केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि आत्मा का सूर्य से जुड़ जाना है। यह स्तोत्र हमारे भीतर छिपी हुई ऊर्जा, विश्वास और चेतना को जाग्रत करता है। जो भक्त श्रद्धा और शुद्ध भाव से सूर्यदेव का स्मरण करता है, उसके जीवन से अंधकार स्वतः दूर होने लगता है। रोग, भय और निराशा सूर्य की किरणों के समान नष्ट हो जाते हैं और जीवन में नया प्रकाश फैल जाता है।
आइए, हम सभी प्रतिदिन सूर्य स्तोत्र के माध्यम से अपने जीवन को दिव्यता से भरें और उस परम तेजस्वी शक्ति के चरणों में अपना नमन अर्पित करें। जय आदित्य! जय भास्कर! जय सूर्यदेव!
सूर्यस्तोत्रम् | नारद जी द्वारा रचित | Surya Stotram
।। सूर्यस्तोत्रम् ।।
कृष्णाजिनपरिच्छिन्ने ह्युपविष्टो वरासने ।
ऋषितोयातटे रम्ये प्रतिष्ठाप्य महामुनिः ॥ १॥
सूर्यस्य प्रतिमां रम्यां सर्वदारिद्र्यनाशिनीम् ।
तुष्टाव विविधैः स्तोत्रैरादित्यं तिमिरापहम् ॥ २॥
नमस्ते ऋक्स्वरूपाय साम्नां धामग ते नमः ।
ज्ञानैकरूपदेहाय निर्धूततमसे नमः ॥ ३॥
शुद्धज्योतिःस्वरूपाय निर्मूर्तायामलात्मने ।
वरिष्ठाय वरेण्याय सर्वस्मै परमात्मने ॥ ४॥
नमोऽखिलजगद्व्यापिस्वरूपानन्दमूर्तये ।
सर्वकारणभूताय निष्ठायै ज्ञानचेतसाम् ॥ ५॥
नमः सर्वस्वरूपाय प्रकाशालक्ष्यरूपिणे ।
भास्कराय नमस्तुभ्यं तथा दिनकृते नमः ॥ ६॥
ईश्वर उवाच –
एवं संस्तुवतस्तस्य पुरतस्तस्य चेतसा ।
प्रादुर्बभूव देवेशि जगच्चक्षुः सनातनः ॥७।
इति श्रीस्कन्दपुराणे
नारदकृतं सूर्यस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।।
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