आप आम इंसान नहीं हैं।

आप आम इंसान नहीं हैं — ईश्वर ने आपको किसी विशेष कार्य के लिए चुना है।

एक बार वाल्मीकि जी ने नारद मुनि से पूछा —

“इस संसार में सबसे श्रेष्ठ पुरुष कौन है?”

नारद मुनि मुस्कुराए और बोले —

“राम।”

और फिर उन्होंने वाल्मीकि जी को भगवान राम का जीवन सुनाया — उनकी करुणा, उनकी मर्यादा, उनका त्याग।

वाल्मीकि जी ध्यानमग्न होकर राम का चरित्र सुनते रहे।

एक दिन जब वे नदी किनारे स्नान करने जा रहे थे, उन्होंने एक प्रेमी पक्षी-जोड़ा देखा — दोनों साथ थे, प्रेम में डूबे हुए, एक-दूसरे के साथ संसार भूल चुके थे।

तभी अचानक एक शिकारी ने तीर चलाया।
नर पक्षी गिर पड़ा… मर गया।
मादा पक्षी चीत्कार करने लगी — रोती रही, बिलखती रही।
उसका दुख देखकर वाल्मीकि जी के हृदय में करुणा उमड़ पड़ी।

और तभी उनके मुख से वे अमर वचन निकले—

मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः।
यत् क्रौञ्चमिथुनादेकम् अवधीः काममोहितम्।।

(हे शिकारी! तू शाश्वत काल तक प्रतिष्ठा न पाए, क्योंकि तूने प्रेम में मग्न इस क्रौंच पक्षी-जोड़े में से एक को मार डाला।)

वो चकित रह गए — ये तो कविता बन गई!
उन्होंने तो कभी कविता नहीं लिखी थी… फिर ये छंद कैसे निकला?

तभी ब्रह्मा जी प्रकट हुए और बोले —

“हे वाल्मीकि, ये मेरी प्रेरणा है।
तुम राम के चरित्र को कविता के रूप में लिखो — ताकि युगों-युगों तक लोग राम को जान सकें।”

और ऐसे जन्म हुआ रामायण का — दुनिया के पहले महाकाव्य का।

इस घटना से हम क्या सीखते हैं-:

  1. जब हृदय अत्यंत दुख या प्रेम से भर जाता है — वहीं से सृजन जन्म लेता है।
  2. जब ईश्वर किसी को चुनता है, तो शब्द, सामर्थ्य, अवसर — सब अपने आप मिल जाते हैं।
  3. वाल्मीकि जी पहले कभी कवि नहीं थे, लेकिन ईश्वर ने उन्हें चुना, तो वे “आदि कवि” बन गए।

इसलिए कभी नहीं सोचना चाहिए कि —
“मेरे पास साधन नहीं हैं”, “मेरे पास समय नहीं है”, या “मैं बस एक आम आदमी हूँ।”

आपको नहीं पता —
शायद ईश्वर ने आपको भी किसी महान कार्य के लिए चुना है…।

बस अपना कर्म करते रहिए, निष्ठा से, प्रेम से, समर्पण से। क्योंकि जब समय आता है, तो हर चीज़ अपने आप सुंदरता से सही जगह बैठ जाती है।


Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Scroll to Top