उत्सव उसे कहते हैं जिसमें प्रत्येक जीव उल्लासित व प्रसन्नता महसूस कर सकें। चाहे कोई भी धर्म हो या संप्रदाय सभी दया, करुणा, अहिंसा, प्रेम और सद्भाव से जीना सिखाते हैं।
यदि कोई संप्रदाय उत्सवों व परंपराओं के नाम पर जीवों की हत्या करता है या किसी भी तरह की हिंसा करता है, तो फिर वह धर्म नहीं है, वह केवल अमानवीय आचरण व क्रुरता है।
क्या किसी जीव की हत्या करके तथाकथित मानव ईश्वर व प्रकृति से रहम की उम्मीद कर सकता है..??
इसलिए कृपया करके मानवता दिखाइए और बेजुबान जीवों पर दया कीजिए… क्योंकि प्रत्येक जीव ईश्वर का बनाया हुआ है और सभी को जीने का अधिकार है।
अतः निवेदन है कि क्षणिक रस इंद्रिय तृप्ति अर्थात जीभ के स्वाद के लिए कृपया जीवों की हत्या ना करें।
प्रत्येक जीव को जीने का अधिकार है, इसलिए कृपया किसी भी जीव से उसका यह अधिकार मत छीनिये। जियें और जीने दें।
धन्यवाद!!

