
आहे नील शइल, भजन लिरिक्स
Ahe Nila Saila Bhajan Lyrics Indresh Ji
आहे नील शइल भजन लिरिक्स यह सुन्दर भजन इन्द्रेश जी महाराज के स्वर में गाया हुआ है और भजन के पद जो की एक कथावाचक और संगीतकार दोनों है बहुत सुन्दर और मधुर भजन (Ahe Nila Saila Bhajan Lyrics Indresh Ji) इन्द्रेश उपाध्याय जी के मधुर स्वर में लिरिक्स प्रस्तुत है तो आइये स्मरण करें इस मुग्ध कर देने वाले भजन को :-
Shri Indresh Upadhyay Ji Bhajan Lyrics
आहे नील शइल, प्रबल मत्त बारण,
प्रबल मत्त बारण
मो आरत नलिनी वन कु कर दलन,
आहे नील शइल ॥
गजराज चिंता कला थाई घोर जलेन,
चक्र पेशि नाक नाशि उद्धरिल आपण,
आहे नील शइल ॥
घोर बने मृगुणी कु पड़िथिला कषण,
केड़े बड़ विपत्तिर करिअछ तारण,
आहे नील शइल ॥
कुरुसभा तले शुणि द्रौपदीर जणाण,
कोटि वस्त्र देई हेले लज्जाकल वारण,
आहे नील शइल ॥
रावण र भाई विभिषण गला शरण,
शरण सम्भालि ताकु लंके कल राजन,
आहे नील शइल ॥
प्रह्लाद पिता से जे बड़ दुष्ट दारुण,
स्तंम्भरू बाहारि ताकु विदारिल तक्षण,
प्रह्लाद पिता से जे बड़ दुष्ट दारुण,
स्तंम्भरू बाहारि ताकु विदारिल तक्षण,
आहे नील शइल ॥
कहे सालबेग हिन जाति रे मुं जवन,
श्रीरंगा चरण तले, श्रीरंगा चरण तल,
करु अक्षि जणाण ॥
आहे नील शइल, प्रबल मत्त बारण,
प्रबल मत्त बारण
मो आरत नलिनी वन कु कर दलनै,
आहे नील शइल ॥
संगीत गायक – इन्द्रेश उपाध्याय जी (भक्तिपथ) (Swar Indresh ji maharaj)
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इन्द्रेश जी महाराज जो की प्रसिद्द कथावाचक कृष्णा चन्द्र शाश्त्री जी के पुत्र भी है, इन्द्रेश उपाध्याय जी एक प्रसिद्ध युवा कथावाचक हैं, जिन्होंने भागवत कथा, राम कथा, और सनातन धर्म को जनमानस तक पहुँचाने का कार्य पूरे समर्पण से किया है। पढ़ें इन्द्रेश उपाध्याय महाराज जीवन परिचय, कथा सेवा व भक्ति पथ के बारे में और इन्द्रेश जी महाराज भजन लिरिक्स




