आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी कि देवशयनी एकादशी। इस दिन से भगवान श्रीहरि योग निद्रा में चले जाते हैं। इसलिए शादी-विवाह अन्य शुभ कार्यों का आयोजन बंद कर दिया जाता है। इसके बाद जब चातुर्मास बीतने पर कार्तिक शुक्ल एकादशी को भगवान श्रीविष्णु निद्रा से जागते हैं। इस तिथि को प्रबोधिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन से शुभ कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। लेकिन बता दें कि देवशयनी एकादशी से पूर्व यानी कि आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भी शुभ कार्य किये जा सकते हैं। यह दिन अत्यंत ही शुभ होता है। इसे भढली, (भडल्या) नवमी या अबूझ मुहूर्त भी कहते हैं।
अबूझ मुहूर्त “भड़ल्या नवमी
भड़ल्या नवमी को उत्तर भारत में विवाह के लिए अबूझ विवाह मुहूर्त माना जाता है। सनातन धर्म में विवाह के लिए कुछ अबूझ मुहूर्त बताए गए हैं। भढली (भड़ल्या) नवमी उन्हीं में से एक होती है। इस वर्ष भढली नवमी 22 जुलाई 2026, बुधवार को पड़ रही है। इसके ठीक तीन दिन बाद 25 जुलाई, शनिवार को देवशयनी एकादशी है। अत: कोई भी शुभ कार्य करना है और कोई मुहूर्त नहीं मिल रहा तो आप 22 जुलाई, बुधवार को अबूझ मुहूर्त भड़ल्या नवमी के दिन शुभ कार्य संपन्न कर सकते है।(कार्य के अनुसार शुभ समय जरूर किसी विद्वान से जान लेना चाहिए, क्योंकि अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग लग्न व समय निर्धारित होते हैं)
अबूझ मुहूर्त क्या है।
अबूझ तिथि का अर्थ है कि जिन लोगों के विवाह व अन्य शुभ कार्य जैसे गृह प्रवेश, गृह निर्माण, जमीन- मकान, वाहन खरीदना, कुछ विशेष संस्कार इत्यादि के लिए कोई मुहूर्त नहीं निकलता तो इस दिन ये शुभ कार्य किये जाए तो उनके शुभ कार्यों में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आता है। कहने का अर्थ है कि बिना किसी चिंता के इन विशेष तिथियों पर मांगलिक कार्य संपन्न किए जाते हैं। ये दिन स्वयं में सिद्ध होते हैं और शुभ माने जाते हैं।
ये होते हैं अबूझ विवाह मुहूर्त
सनातनी कैलेंडर के अनुसार, एक वर्ष में बसंत पंचमी, अक्षय तृतीया, फुलेरदोज, रामनवमी, जानकी नवमी, पीपल पूर्णिमा, गंगा दशमी, भडल्या नवमी इत्यादि अबूझ शुभ मुहूर्त होते है। इस दिन केवल शुभ समय व लग्न की जानकारी करके अपने कार्य संपन्न कर सकते है।
वैसे तो यह सभी अबूझ मुहूर्त शुभ माने गए हैं, लेकिन अबूझ मुहूर्त के दिन कौनसा समय किस कार्य के लिए शुभ रहेगा, यह जरूर जान लेना चाहिए। क्योंकि प्रत्येक दिन में कुछ शुभ समय होते हैं और कुछ अशुभ समय होते हैं, अशुभ समय जैसे- राहुकाल, दुष्टमुहूर्त, कालबेला, इत्यादि समय का त्याग करना चाहिए। और प्रत्येक शुभ कार्य के लिए अलग-अलग समय व लग्न होते हैं। अतः कार्य के अनुसार उस दिन का शुभ समय- मुहूर्त जरूर देख लेना चाहिए।
(नोट-: इस समय गुरु बृहस्पति ग्रह भी अस्त चल रहे हैं जो 11 अगस्त को उदय होंगे और उससे पहले 25 जुलाई को देव शयन कर जाएंगे। ऐसी स्थिति में लगभग चार महीने तक कोई शुभ मुहूर्त नहीं मिल पाएंगे। अतः यदि आपको कोई शुभ कार्य करना है तो उसके लिए भड्ल्या नवमी का मुहूर्त काफी अनुकूल रह सकता है)



